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सीपीआई ने पिनाराई विजयन को केरल विपक्ष का नेता नियुक्त करने का किया विरोध

तिरुवनंतपुरम, 6 मई (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के कदम का खुले तौर पर विरोध किया है। यह मुद्दा सीपीआई नेतृत्व की बैठक में उठा, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तर्क दिया कि यह पद किसी नए चेहरे को दिया जाना चाहिए और वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की चुनावी हार के लिए विजयन की नेतृत्व शैली को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।
सीपीआई ने पिनाराई विजयन को केरल विपक्ष का नेता नियुक्त करने का किया विरोध

तिरुवनंतपुरम, 6 मई (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के कदम का खुले तौर पर विरोध किया है। यह मुद्दा सीपीआई नेतृत्व की बैठक में उठा, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तर्क दिया कि यह पद किसी नए चेहरे को दिया जाना चाहिए और वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) की चुनावी हार के लिए विजयन की नेतृत्व शैली को आंशिक रूप से जिम्मेदार ठहराया।

सीपीआई, एलडीएफ का दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है, जो विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद अब विपक्ष में चला गया है।

वामपंथी दलों को विधानसभा में केवल 35 सीटें मिलीं, जबकि सीपीआईएम ने 26 सीटें, सीपीआई ने आठ और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने एक सीट जीती।

इसके विपरीत, कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) ने 102 सीटों के साथ सत्ता में वापसी की, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा में तीन सीटों के साथ अपना खाता खोला।

इस करारी हार के बावजूद विजयन अब तक चुप हैं और उन्होंने न तो मीडिया से बात की है और न ही सोशल मीडिया पर कोई बयान जारी किया है। उनकी चुप्पी ने इस बात को लेकर अटकलों को हवा दी है कि क्या वे एक दशक तक मुख्यमंत्री रहने के बाद विपक्ष के नेता की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

वामपंथी खेमे में नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा तेज हो रही है। सीपीआई नेताओं ने संकेत दिया है कि जब तक विजयन स्वयं पद नहीं छोड़ते, वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना सीमित ही रहेगी।

हालांकि, अगर वे पद स्वीकार नहीं करते हैं, तो पूर्व वित्त मंत्री और सीपीआईएम के वरिष्ठ नेता के.एन. बालागोपाल एक संभावित दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।

विजयन पर दबाव बढ़ाते हुए पूर्व वामपंथी विधायक सेबेस्टियन पॉल ने दिन में पहले सार्वजनिक रूप से उनके कामकाज की आलोचना की और उन्हें चुनावी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। सीपीआईए राज्य सचिवालय की बैठक के बाद इस मुद्दे पर आधिकारिक निर्णय आने की उम्मीद है।

वामपंथी खेमे के एक वर्ग का मानना ​​है कि सत्ताधारी गठबंधन के पास भारी बहुमत होने के कारण, केवल एक राजनीतिक रूप से अनुभवी और राजनीतिक रूप से कुशल नेता ही सरकार को प्रभावी ढंग से चुनौती देने में सक्षम होगा।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि गठबंधन के भीतर बढ़ते विरोध के बावजूद, यह तर्क विजयन की संभावनाओं को जीवित रखे हुए है।

इस बीच सीपीआईएम के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने मीडिया से कहा कि पार्टी चुनावी हार के बाद सभी संगठनात्मक स्तरों पर गहन आत्मनिरीक्षण करेगी।

--आईएएनएस

ओपी/डीकेपी

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