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कांग्रेस ने पश्चिम एशिया सीजफायर का स्वागत किया, केंद्र से विपक्ष से बातचीत करने का आग्रह किया

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष-विराम का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक 'अहम कदम' बताया। साथ ही, कांग्रेस ने गैर-कानूनी युद्धों और नागरिकों पर हमलों की आलोचना करते हुए इसे मानवता और वैश्विक नियमों के खिलाफ 'अक्षम्य अपराध' करार दिया।
कांग्रेस ने पश्चिम एशिया सीजफायर का स्वागत किया, केंद्र से विपक्ष से बातचीत करने का आग्रह किया

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष-विराम का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक 'अहम कदम' बताया। साथ ही, कांग्रेस ने गैर-कानूनी युद्धों और नागरिकों पर हमलों की आलोचना करते हुए इसे मानवता और वैश्विक नियमों के खिलाफ 'अक्षम्य अपराध' करार दिया।

कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित एक प्रस्ताव में, पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि वह विपक्ष के साथ मिलकर 'भारत की ऐतिहासिक पहचान को एक सक्रिय वैश्विक शांति समर्थक के रूप में फिर से स्थापित करे।'

कांग्रेस के प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा सरकार को विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए, तत्काल अपनी रणनीति में सुधार करना चाहिए, और शांति तथा एक न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक सैद्धांतिक, सक्रिय और विश्वसनीय आवाज के रूप में भारत की ऐतिहासिक भूमिका को बहाल करने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

पार्टी ने दावा किया कि भारत में, 1947 के बाद से लगातार आने वाली सरकारों ने इन वैश्विक सिद्धांतों को बनाए रखा है, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' ('दुनिया एक परिवार है'), महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत, और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति में निहित विदेश नीति की परंपरा से प्रेरित हैं।

प्रस्ताव में कहा गया कि युद्धविराम भारत को बढ़ती लागत का फिर से आकलन करने का मौका देता है। अक्टूबर 2023 में इजरायल-हमास युद्ध के बाद से, पश्चिम एशिया से भारत के ऊर्जा आयात (पेट्रोलियम मंत्रालय 2025 के आंकड़ों के अनुसार, तेल का 40 प्रतिशत) में रुकावटें आईं, जिससे एलपीजी और उर्वरकों की कीमतें बढ़ गईं।

बयान में आगे कहा गया कि ईरान और क्षेत्रीय प्रॉक्सी के साथ तनावपूर्ण संबंधों ने हिंद महासागर में सुरक्षा प्रदाता के तौर पर भारत की भूमिका को कमजोर किया, जबकि पश्चिमी देशों के साथ कथित जुड़ाव के कारण 'ग्लोबल साउथ' में भारत का नेतृत्व भी कमजोर पड़ा।

--आईएएनएस

एसडी/डीकेपी

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