'रीतम सिंह जैसे व्यक्ति को प्रवक्ता कैसे बना दिया', पूर्व सैनिकों ने कांग्रेस नेता की टिप्पणियों पर पलटवार किया
नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता रीतम सिंह की ओर से भारतीय सेना की रिटायर्ड अधिकारियों को लेकर टीवी डिबेट और राजनीति में उनकी भागीदारी को लेकर की गई टिप्पणियों पर पूर्व सैनिकों ने उनको निशाने पर लिया है।
रीतम सिंह की ओर से भारतीय सेना के रिटायर्ड अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा गया था कि टीवी डिबेट और राजनीति में उनकी भागीदारी, सब्सिडी वाली डिफेंस कैंटीन की सुविधा, नागरिक नियंत्रण के लिए खतरा पैदा कर सकती है। रीतम सिंह की ओर से यह भी कहा गया था कि इससे पाकिस्तान, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
सोमवार को कई पूर्व सैनिकों ने कांग्रेस प्रवक्ता रीतम सिंह पर जमकर निशाना साधा। पूर्व सैनिकों ने कांग्रेस प्रवक्ता की बातों का विरोध करते हुए कहा कि सेना के रिटायर्ड सदस्य भी संवैधानिक अधिकारों वाले पूरे नागरिक होते हैं। इनमें अपनी राय रखने, वोट देने, चुनाव लड़ने और लोकतांत्रिक चर्चा में हिस्सा लेने की आजादी शामिल है।
पूर्व सैनिकों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अपनी सर्विस पूरी करने के बाद भी वे टैक्स देते रहते हैं और उनके लोकतांत्रिक अधिकार बने रहते हैं, जबकि भारत की व्यवस्था यह पक्का करती है कि सेना के जवानों पर नागरिकों (सरकार) का कंट्रोल रहे।
यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ था जब रीतम सिंह ने सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के बारे में मेजर जनरल हर्षा काकर (रिटायर्ड) की बातों पर प्रतिक्रिया दी थी। रीतम सिंह ने कहा था, "डिफेंस कैंटीन से सस्ती शराब पीने वाले रिटायर्ड आर्मी अंकल को टीवी, राजनीति या आम तौर पर खबरों से दूर रहने के लिए कहा जाना चाहिए। अगर इन अंकल की चली, तो भारत में भी पाकिस्तान, बांग्लादेश या दक्षिण-पूर्व एशिया की तरह मिलिट्री तख्तापलट की पूरी संभावना है। आर्मी अंकल को याद रखना चाहिए कि प्रोपेगैंडा सैनिक को लड़ने या गोली खाने के लिए जोश दिलाने के लिए तो अच्छा है, लेकिन इसका इस्तेमाल आम नागरिकों को गुमराह करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"
उन्होंने पोस्ट किया, "रिटायरमेंट के समय आर्मी अंकल से एक घोषणापत्र पर साइन करवाया जाना चाहिए कि वे राजनीति से दूर रहेंगे। हम देश के लिए उनकी सेवा को सलाम करते हैं। लेकिन उन्हें भी आम नागरिकों की राजनीति से दूर रहने का सम्मान करना चाहिए क्योंकि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है।"
उन्होंने पोस्ट किया, "उनका काम नागरिक प्रमुख से आदेश लेना है, न कि यह तय करना कि नागरिक प्रमुख को कैसे फैसले लेने चाहिए। टीवी पर शराब पिए हुए रिटायर्ड आर्मी अंकल भारत के उस मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने मौजूदा सत्ताधारी पार्टी में अपनी पैठ बना ली है। भारत के इस मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स को खत्म करने की जरूरत है।"
इन बातों पर कई पूर्व सैनिकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिनमें मेजर जनरल काकर (रिटायर्ड), लेफ्टिनेंट जनरल पी.आर. शंकर (रिटायर्ड) और कर्नल रोहित देव (रिटायर्ड) शामिल थे। उन्होंने इस सुझाव को खारिज कर दिया कि सेना के रिटायर्ड जवानों को अपनी सर्विस पूरी करने के बाद अपने संवैधानिक अधिकारों को छोड़ देना चाहिए या उन पर रोक लगानी चाहिए।
मेजर जनरल काकर (रिटायर्ड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सवाल उठाया कि रीतम सिंह को कांग्रेस का प्रवक्ता कैसे बनाया गया और उनकी बातों के पीछे समझ की कमी की आलोचना की। उन्होंने कहा, "मुझे सच में हैरानी होती है कि कांग्रेस ने रीतम सिंह जैसे व्यक्ति को प्रवक्ता कैसे बना दिया। उनकी जानकारी न सिर्फ कम है, बल्कि उनकी सोच भी बेतुकी है। मैंने देश की सेवा करके अपना ओहदा और सम्मान ऐसे हालात में हासिल किया है, जिनके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा। जलन मत रखिए। अपनी राय रखना मेरा संवैधानिक अधिकार है। आपकी बातें आपकी शिक्षा और परवरिश का अपमान हैं। मानसिक रूप से परिपक्व बनिए।"
लेफ्टिनेंट जनरल शंकर (रिटायर्ड) ने भी रीतम सिंह की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सेना के रिटायर्ड सदस्यों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा सेना के प्रति सम्मान की कमी को दिखाती है और चेतावनी दी कि ऐसी बातों के राजनीतिक नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "आपकी यह पोस्ट दिखाती है कि सेना के प्रति आपके मन में कितना अनादर है। अपनी इन कोशिशों और भाषा को जारी रखिए... आपकी किस्मत में बस यही करना लिखा है। लोग यह पक्का करेंगे कि भारतीय सेना कभी आपकी पार्टी के अधीन न आए और देश के लिए यही बेहतर होगा।"
कर्नल रोहित देव (रिटायर्ड) ने भी रीतम सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि रिटायरमेंट के बाद भी पूर्व सैनिक आम नागरिक ही रहते हैं और उन्हें भी दूसरे भारतीयों की तरह ही लोकतांत्रिक अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा, "पूर्व सैनिक भारत के नागरिक हैं, जो वोट भी देते हैं और भारत के लोकतंत्र में उनकी अहम भूमिका होती है। वे पहले की तरह ही, जब वे वर्दी में सेवा कर रहे थे, अपने टैक्स भी समय पर भरते हैं। उन्हें भी अपनी बात कहने, वोट देने और चुनाव लड़ने जैसी आजादी है। एक नासमझ और ओछे व्यक्ति की बातें ऐसी ही होती हैं।"
--आईएएनएस
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