बांग्लादेशी मतदाताओं को बचाने के लिए एसआईआर का विरोध कर रही कांग्रेस : आर. अशोक
बेंगलुरु, 16 मई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर अशोक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध इसलिए कर रही है, क्योंकि उसे कर्नाटक में “बांग्लादेशी मुस्लिम मतदाताओं” का समर्थन खोने का डर है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक में 10 लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक रह रहे हैं और उन्होंने किसी से भी उनके आरोप को गलत साबित करने की चुनौती दी।
उन्होंने कहा, “हाल ही में पुलिस आयुक्त ने 250 बांग्लादेशियों को हवाई मार्ग से वापस भेजने पर 65 लाख रुपये खर्च किए। बेंगलुरु के महादेवपुरा, चिक्कमगलूरु और कोडागु के कॉफी बागानों में हजारों बांग्लादेशी रह रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया से इस पर रोक लगेगी।”
अशोक ने कहा कि असली मतदाताओं को पुनरीक्षण प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हर मतदान केंद्र पर कांग्रेस, भाजपा और जेडी(एस) के एजेंट मौजूद रहेंगे और वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की कोई संभावना नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया, “कांग्रेस बांग्लादेशी मुसलमानों के वोट से चुनाव जीतने का सपना देख रही थी। एसआईआर से यह बंद हो जाएगा, इसलिए वह चिंतित है।”
अशोक ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान अधिक हिंदुओं के नाम हटाए गए थे, लेकिन न तो किसी हिंदू संगठन और न ही भाजपा ने विरोध किया।
उन्होंने आरोप लगाया, “कर्नाटक में कांग्रेस ने 10 लाख बांग्लादेशियों को पहचान पत्र जारी किए हैं और वह नहीं चाहती कि उन्हें निर्वासित किया जाए।”
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए अशोक ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपने तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘साधना समावेश’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जबकि जरूरतमंदों की अनदेखी की जा रही है।
उन्होंने कहा, “राज्य में अनाथों, वरिष्ठ नागरिकों और ट्रांसजेंडर समुदाय जैसे कमजोर वर्गों की सब्सिडी और पेंशन बंद कर दी गई है। जब राज्य का खजाना खाली है, तब कांग्रेस को उपलब्धि सम्मेलन आयोजित करने का क्या अधिकार है?”
अशोक ने आरोप लगाया कि ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये और ‘अन्नभाग्य’ योजना के तहत 700 करोड़ रुपये लाभार्थियों तक नहीं पहुंचे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अनाथ बच्चों के लिए निर्धारित 73 करोड़ रुपये जारी नहीं किए गए और अनुसूचित जातियों के लिए आवंटित 45,000 करोड़ रुपये “लूट लिए गए”।
उनके अनुसार, राजस्व विभाग के तहत आने वाली 12 प्रकार की पेंशन पिछले तीन महीनों से वितरित नहीं की गई हैं, जबकि 81.88 लाख लाभार्थी उन पर निर्भर हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, “वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, संध्या सुरक्षा सहायता और ट्रांसजेंडर समुदाय की सहायता राशि नहीं दी जा रही है। एसिड अटैक पीड़ितों को हर महीने मिलने वाली 10,000 रुपये की सहायता नियमित रूप से नहीं मिल रही। देवदासियों को 2,000 रुपये और स्वतंत्रता सेनानियों को 10,000 रुपये की सहायता नहीं मिल रही है।”
--आईएएनएस
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