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कांग्रेस ने महिलाओं को सशक्त बनाने वाले कदमों का विरोध किया: असम भाजपा नेता

गुवाहाटी, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। असम भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और मंगलदोई निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार नीलिमा देवी ने सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक का जोरदार समर्थन किया और दावा किया कि कांग्रेस ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने वाले कदमों का विरोध किया है।
कांग्रेस ने महिलाओं को सशक्त बनाने वाले कदमों का विरोध किया: असम भाजपा नेता

गुवाहाटी, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। असम भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और मंगलदोई निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार नीलिमा देवी ने सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक का जोरदार समर्थन किया और दावा किया कि कांग्रेस ने महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने वाले कदमों का विरोध किया है।

यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए नीलिमा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानमंडलों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव लाकर ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन से जुड़े इस विधेयक का विरोध कर कांग्रेस ने शासन और निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी चाहने वाली महिलाओं के हितों और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ काम किया है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक पहल के जरिए महिला सशक्तीकरण के प्रति अपनी वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाई है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे महिलाओं को राजनीति में उनका उचित स्थान देने से इंकार कर रहे हैं।”

नीलिमा देवी ने कहा कि महिला मोर्चा ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को रोकने की कोशिशों के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया।

उनके अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों में विधेयक के समर्थन में अभियान को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 28 अप्रैल को होने वाले विरोध कार्यक्रम में करीब 1,000 महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है, जो इस कानून के समर्थन और इसके लागू करने की मांग को लेकर आवाज बुलंद करेंगी।

नीलिमा देवी ने कहा कि देशभर की महिलाएं अब अपने राजनीतिक अधिकारों को लेकर अधिक जागरूक हो रही हैं और निर्वाचित सदनों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठाती रहेंगी।

यह घटनाक्रम संसद के 16 अप्रैल से बुलाए गए विशेष सत्र की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिसमें सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था।

हालांकि, परिसीमन से जोड़ने के मुद्दे पर कांग्रेस और कई अन्य विपक्षी दलों के कड़े विरोध और आपत्तियों के कारण सत्र में यह विधेयक पारित नहीं हो सका, जिससे राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया।

प्रस्तावित विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने की व्यवस्था करता है। यह लंबे समय से लंबित मांग रही है, जिस पर केंद्र की विभिन्न सरकारों ने कई बार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह विधेयक राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ऐतिहासिक लैंगिक असंतुलन को दूर करने की दिशा में एक ऐतिहासिक सुधार है।

वहीं, विपक्षी दलों का तर्क है कि परिसीमन से जुड़े इस विधेयक पर और विचार-विमर्श की जरूरत है, खासकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-कोटा से जुड़े प्रावधानों पर। उन्होंने इसके समय और सरकार द्वारा प्रस्तावित क्रियान्वयन ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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