कर्नाटक कैबिनेट में बंटवारे से पहले अहम विभागों के लिए लॉबिंग करने में जुटे मंत्री
बेंगलुरु, 7 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक में नए मंत्रियों को शुक्रवार शाम तक विभाग मिलने की उम्मीद है। इसे लेकर कांग्रेस के भीतर जबरदस्त लॉबिंग शुरू हो गई है और कई मंत्री अहम विभाग पाने की होड़ में हैं। वहीं, विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार विधायकों की नाराजगी को शांत करने की कोशिश में जुटे हैं।
कहा जा रहा है कि श्रम, समाज कल्याण, वित्त, योजना और उच्च शिक्षा जैसे अहम विभागों की सबसे ज्यादा मांग है और कई मंत्रियों ने पार्टी नेतृत्व को अपनी पसंद बता दी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हाल ही में मंत्री बने बसवराज रायरेड्डी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री के पूर्व वित्त सलाहकार के तौर पर अपने अनुभव का हवाला देते हुए वित्त विभाग की कमान संभालने की अपनी इच्छा खुलकर जाहिर की।
रायरेड्डी ने पत्रकारों से कहा, "मैंने मुख्यमंत्री के वित्त सलाहकार के तौर पर काम किया है। पार्टी ने सभी की खूबियों को परखा होगा। अगर मुझे वित्त विभाग की ज़िम्मेदारी दी जाती है, तो मैं इसका स्वागत करूंगा। मेरी दिलचस्पी सिर्फ टैक्स कलेक्शन में है। मुख्यमंत्री को ही बजट तैयार करने और पेश करने दें। मुझे तबादले के अधिकार भी नहीं चाहिए। चपरासी से लेकर आईएएस अफसर तक किसी का भी तबादला करने का अधिकार मुख्यमंत्री अपने पास रख सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वित्त विभाग नहीं दिया जाता है, तो वे किसी भी विकास-उन्मुख विभाग में काम करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, "मैं 24 घंटे काम करता हूं। मेरी दिलचस्पी प्लानिंग डिपार्टमेंट में भी है, जिसे कोई और नहीं लेना चाहता। गोविंदराव कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की जरूरत है और इसमें मेरी व्यक्तिगत दिलचस्पी है। मुझे जो भी पोर्टफोलियो दिया जाएगा, मैं पूरी निष्ठा के साथ काम करूंगा।"
कांग्रेस ने 3 अगस्त को कैबिनेट में 19 मंत्रियों को शामिल किया लेकिन अभी तक विभागों का बंटवारा नहीं हुआ है, जिसके कारण पार्टी के भीतर जबरदस्त लॉबिंग चल रही है।
हाल ही में मंत्री पद की शपथ लेने वाले पी. नरेंद्रस्वामी और शिवराज तंगदगी, जो दोनों ही वंचित समुदायों से आते हैं। माना जा रहा है कि वे समाज कल्याण विभाग की मांग कर रहे हैं। वहीं, खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और सात बार सांसद रहे के.एच. मुनियप्पा पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे अपने मौजूदा विभाग से खुश नहीं हैं और किसी अहम विभाग की उम्मीद कर रहे हैं।
इस दौरान, राजनीतिक गतिविधियां बेंगलुरु में ही केंद्रित रही हैं और कई मंत्री अहम विभागों का कामकाज संभालने के लिए राज्य की राजधानी में ही रुके हुए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दावणगेरे जिले के मंत्री के.एस. बसवंथप्पा और एस.एस. मल्लिकार्जुन मुख्यमंत्री शिवकुमार के मंत्रियों को अपने ज़िलों का दौरा करने और सूखे की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने के निर्देश के बावजूद लीडरशिप से बातचीत के लिए बेंगलुरु में ही रुके हुए हैं।
पोर्टफोलियो आवंटन की यह कवायद उन विधायकों के बीच बढ़ते असंतोष के बीच हो रही है, जिन्हें हालिया विस्तार के दौरान कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी।
नाराज नेताओं को मनाने की कोशिशों के तहत मुख्यमंत्री के पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ पूर्व मंत्री एम.सी. सुधाकर से मुलाकात करने की उम्मीद है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, 40 विधायक विधानसभा सत्र के पहले दिन बैठक करने की योजना बना रहे हैं। अगर मतभेद नहीं सुलझाए गए, तो यह घटनाक्रम सरकार के लिए राजनीतिक रूप से शर्मनाक साबित हो सकता है। इसलिए, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट विधायकों से संपर्क बढ़ा दिया है।
इन कोशिशों के तहत, सीएम शिवकुमार सात बार के एमएलए टीबी जयचंद्र के घर जाने वाले हैं। जयचंद्र ने मंत्रियों की लिस्ट देखने के बाद नई कैबिनेट के गठन की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी और इसे "शर्म की बात" कहा था।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज़ जयचंद्र ने विधानसभा में विपक्ष के साथ अपने लिए बैठने की उचित व्यवस्था करने के लिए पत्र भेजने की धमकी भी दी है।
आज बाद में विभागों के बंटवारे की उम्मीद है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है: एक तरफ क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक समीकरणों में संतुलन बनाना और दूसरी तरफ विधानसभा सत्र के दौरान पार्टी के भीतर पनप रही नाराजगी को और बढ़ने से रोकना।
--आईएएनएस
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