कांग्रेस डूबता जहाज, विपक्षी दलों का विलय भाजपा के लिए फायदेमंद : सीएम फडणवीस
मुंबई, 12 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों छोटे दलों के कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कांग्रेस को 'डूबता जहाज' करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दल कांग्रेस में विलय भी करते हैं, तो उसका सबसे बड़ा फायदा भाजपा को होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम फडणवीस ने विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विलय की चर्चाओं को लेकर उनकी स्थिति बिल्कुल साफ है। मुख्यमंत्री ने व्यंग्य करते हुए कहा, "बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना।"
उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत का नाम लिए बिना उन पर तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति न कांग्रेस से जुड़ा है और न ही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से, वही इस तरह की चर्चाएं शुरू कर रहा है और फिर पूरा राजनीतिक माहौल उसी पर बहस करने लगता है।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय दलों के नेताओं की राजनीतिक समझदारी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वे इतने समझदार हैं कि किसी डूबते जहाज पर सवार नहीं होंगे। कांग्रेस एक डूबता जहाज है और मुझे नहीं लगता कि क्षेत्रीय दल उसके साथ अपना भविष्य जोड़ना चाहेंगे।
सीएम फडणवीस ने यह भी कहा कि अगर विपक्षी दलों का कांग्रेस में विलय हो जाता है, तब भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। इससे भाजपा के लिए अधिक राजनीतिक अवसर पैदा होंगे। अगर वे विलय करते हैं तो यह हमारा फायदा है, नुकसान नहीं। विपक्ष जितना अपनी अलग पहचान खत्म करेगा, उतनी ही ज्यादा राजनीतिक जगह भाजपा के लिए खुलेगी। फिलहाल हम 'इंतजार करो और देखो' की नीति पर चल रहे हैं।
दरअसल, हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रीय दलों के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हुई हैं। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सार्वजनिक रूप से विपक्षी दलों से कांग्रेस में विलय कर एक मजबूत मोर्चा बनाने की अपील की थी।
इसी बीच एनसीपी (एसपी) के 27वें स्थापना दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र की राजनीति में पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाएं भी तेज हो गईं। इस बहस को उस समय और बल मिला जब कांग्रेस विधायक और वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने दावा किया कि एनसीपी (एसपी) की ओर से पहले ही कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव दिया जा चुका है।
विधायक नाना पटोले ने मीडिया से कहा, "शरद पवार की ओर से कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव पहले भेजा गया था, लेकिन कुछ कारणों से उस पर आगे प्रगति नहीं हो सकी। देशभर में समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने की प्रक्रिया चल रही है, और तृणमूल कांग्रेस तथा एनसीपी (एसपी) भी इस दिशा में विचार कर रहे हैं।"
हालांकि, एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने इन दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव न तो मिला है और न ही पार्टी में कोई चर्चा हुई है।
हाल ही में शरद पवार के मुंबई स्थित आवास 'सिल्वर ओक' में हुई बैठक में भी विलय का मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं था।
संजय राउत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संजय राउत देशहित में खुलकर अपनी राय रखते हैं और लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। उनके सुझावों पर जरूर विचार किया जाएगा।
उधर, भाजपा नेताओं ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। वरिष्ठ भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कांग्रेस को कमजोर पार्टी बताते हुए कहा कि लोग अंततः बेहतर विकल्प की तलाश में भाजपा की ओर आएंगे। ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा तक भाजपा का कोई मजबूत मुकाबला नहीं है और अगले 20 से 25 वर्षों तक पार्टी राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाएगी।
भाजपा नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन ने संभावित विलय को लेकर तंज कसते हुए कहा, "राहुल गांधी और शरद पवार की जोड़ी शानदार रहेगी। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी होता है, लेकिन फिलहाल राज्य में विपक्ष लगभग नजर ही नहीं आता।"
--आईएएनएस
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