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कांग्रेस ने ईंधन करों को लेकर केंद्र पर हमला किया तेज, राहत की मांग की

बेंगलुरु, 27 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र पर पिछले 11 वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर करों के माध्यम से बड़े पैमाने पर 'लूट' का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने ईंधन करों को लेकर केंद्र पर हमला किया तेज, राहत की मांग की

बेंगलुरु, 27 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र पर पिछले 11 वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर करों के माध्यम से बड़े पैमाने पर 'लूट' का आरोप लगाया।

बेंगलुरु स्थित केपीसीसी कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र ने 2014 से पेट्रोल और डीजल पर करों से 43 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए हैं, जो उनके अनुसार लगभग 1,000 करोड़ रुपए प्रतिदिन के बराबर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी की हालिया घोषणा के बावजूद, आम आदमी को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, और दावा किया कि यह कदम निजी तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्पाद शुल्क में कमी एक छल है। सरकार इसे राहत के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचेगा। इसके बजाय, इससे निजी तेल कंपनियों को 3.6 लाख करोड़ रुपए की वार्षिक शुल्क छूट मिलेगी।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आगे आरोप लगाया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद ईंधन की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मई 2014 में पेट्रोल की कीमत 71.41 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 56.71 रुपए प्रति लीटर थी, जबकि बेंगलुरु में वर्तमान कीमतें क्रमशः 102.96 रुपए और 90.99 रुपए प्रति लीटर हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर पेट्रोल और डीजल काफी सस्ते होने चाहिए, और केंद्र सरकार पर राजस्व बढ़ाने के लिए उच्च उत्पाद शुल्क लगाने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2014 से 2025 के बीच पेट्रोल पर औसतन 19.70 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.50 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगाया, जिससे ईंधन कर राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बन गया।

उपमुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र सरकार पर बार-बार उत्पाद शुल्क में संशोधन करने का आरोप लगाया और दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 21 बार संशोधन हुए हैं, जिनमें 12 बार बढ़ोतरी शामिल है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार चुनावों के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ाने की आदी है। 2014, 2019 और 2022 के चुनावों के उदाहरण देते हुए उन्होंने दावा किया कि मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी गईं।

उन्होंने एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि पर भी प्रकाश डाला और बताया कि घरेलू सिलेंडर की कीमत 2014 में 412 रुपए से बढ़कर मार्च 2026 में 913 रुपए हो गई थी। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय एलपीजी की कीमतों में गिरावट आई थी।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह जनता पर ईंधन की ऊंची कीमतों का बोझ डालने के बजाय राहत प्रदान करे।

--आईएएनएस

एमएस/

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