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पीओके में उड़ाई जा रहीं मानवाधिकारों की धज्जियां, उठे सवाल

पीओके में उड़ाई जा रहीं मानवाधिकारों की धज्जियां, उठे सवाल
पीओके में उड़ाई जा रहीं मानवाधिकारों की धज्जियां, उठे सवाल

इस्लामाबाद, 18 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हुकूमत से इस बेहद गैर जिम्मेदाराना और क्रूर हमलों को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने पाकिस्तानी सेना के बढ़ते अत्याचारों की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है।

यूकेपीएनपी ने इस इलाके में आम लोगों की मौत, मनमानी गिरफ्तारी, लोगों को अगवा करने, कम्युनिकेशन ब्लैकआउट, आने-जाने पर रोक और शांति से काम करने वाले राजीनितक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ सजा देने की खबरों पर गहरी चिंता जताई।

पीओके में पाकिस्तानी सेना द्वारा आम लोगों पर किए जा रहे अत्याचारों पर रोशनी डालते हुए, संगठन ने कहा, “न्यायेत्तर हत्याओं, लोगों को अगवा करने, यातना, गैर-कानूनी हिरासत, अत्यधिक बल प्रयोग, और घरों, दुकानों, बिजनेस और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या तोड़फोड़ के आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच होनी चाहिए। आपराधिक कार्यों में लिप्त लोगों को भरोसेमंद और निष्पक्ष कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

यूकेपीएनपी ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तान को पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के खिलाफ “अत्यधिक बल प्रयोग” करने से रोकें। उन पर दबाव डाला जाए।

इसमें कहा गया, “ पाकिस्तान यूएन का सदस्य देश है और बड़े अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संबंधी संधियों का हिस्सा भी, इसलिए पाकिस्तान की जिम्मेदारी है कि वह बुनियादी मानवाधिकारों का सम्मान करे और उनकी रक्षा करे।”

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) की ओर से शेयर की गई जानकारी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, ग्रुप ने कहा कि इस साल 5 जून से दर्जनों आम लोगों की जान चली गई है, जबकि सैकड़ों लोगों को कथित तौर पर गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है। इसमें यह भी कहा गया कि कई परिवार अपने उन प्रियजनों के बारे में जानकारी मांग रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने इलाके में विरोध प्रदर्शनों के दौरान जबरदस्ती गायब कर दिया था।

पीओके में मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवा और दूसरी संचार सेवाएं तुरंत बहाल करने की मांग करते हुए, यूकेपीएनपी ने कहा, “लगातार पाबंदियों ने पूरे समुदाय को अलग-थलग कर दिया है और लाखों प्रवासी कश्मीरी अपने परिवारों से बातचीत नहीं कर पा रहे हैं।”

ग्रुप ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इलाके में हिरासत में लिए गए और गायब हुए सभी लोगों के बारे में तुरंत जानकारी देने की मांग की।

इसमें कहा गया, “कैदियों को अपने परिवार, वकील, मेडिकल मदद और बिना किसी भेदभाव के कानूनी मदद मिलनी चाहिए। जिन लोगों को सिर्फ शांति से अपने बुनियादी अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा कर देना चाहिए।”

यूकेपीएनपी ने आगे मांग की कि प्रदर्शनकारियों के शवों को "तुरंत और बिना किसी शर्त के वापस किया जाए", जिनके बारे में खबर है कि सुरक्षा का हवाला दे अधिकारियों ने परिवार वालों को सौंपने नहीं दिया। इसमें आगे कहा गया, “परिवारों को बिना किसी दबाव, धमकी या शर्तों के इज्जत से दफनाने की इजाजत मिलनी चाहिए।”

ग्रुप ने कब्जे वाले इलाके में “आने-जाने की आजादी, अभिव्यक्ति की आजादी, शांति से इकट्ठा होने, संचार व्यवस्था की बहाली, कानूनी मदद, स्वास्थ्य सेवा और जरूरी सेवाओं को फिर से शुरू करने और उनकी सुरक्षा करने के साथ-साथ ब्लॉक किए गए पासपोर्ट, पहचान के दस्तावेज, सिम कार्ड और बैंक अकाउंट को फिर से शुरू करने” की मांग की।

यूकेपीएनपी ने यूएन से अपील की कि वह पीओके में तुरंत एक निष्पक्ष फैक्ट चेक और मानवाधिकार निगरानी मिशन भेजें, ताकि पूरे इलाके में न्यायेत्तर हत्या, अत्यधिक बल प्रयोग, किडनैपिंग, मनमानी हिरासत, यातना, ठप संचार व्यवस्था, मीडिया एक्सेस पर रोक, सामूहिक सजा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा सके।

--आईएएनएस

केआर/

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