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कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 26 के पहले पांच महीनों में 322.90 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की

कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 26 के पहले पांच महीनों में 322.90 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की
कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 26 के पहले पांच महीनों में 322.90 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की

नई दिल्ली, 5 सितंबर (आईएएनएस)। कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने वित्त वर्ष 26 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में 322.90 मिलियन टन (एमटी) कोयले की आपूर्ति की। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में आपूर्ति किए गए 302.60 एमटी से 6.70 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी कोयला मंत्रालय की ओर से शनिवार को दी गई।

मंत्रालय ने बताया कि अगस्त में सीआईएल ने 60.60 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की है, जो पिछले वर्ष अगस्त की तुलना में 5.50 प्रतिशत अधिक है। अगस्त 2026 में विद्युत क्षेत्र को आपूर्ति भी अगस्त 2025 की तुलना में 4.5 प्रतिशत बढ़कर 48.46 मिलियन टन हो गई। सीआईएल के पास अपने खदानों में 76 मीट्रिक टन कोयले का भंडार है, साथ ही 46 मिलियन टन खनन के लिए तैयार कोयला भी मौजूद है। सितंबर के पहले तीन दिनों में विद्युत क्षेत्र को औसत दैनिक आपूर्ति लगभग 1.35 मिलियन टन थी, जो 4 सितंबर को बढ़कर 1.5 मिलियन टन हो गई।

मंत्रालय के मुताबिक, बारिश कम होने से जमीनी स्तर पर राहत मिलने के बाद कोयले के उत्पादन और आपूर्ति में तेजी आ रही है और आगे इसमें और सुधार होने की संभावना है। लंबे समय तक बारिश के संपर्क में रहने से चिपचिपी और गीली हो चुकी कोयले की परतें अब सूख रही हैं, जिससे ताजा खनन किया गया कोयला आसानी से बहने लगा है और कोयला प्रबंधन संयंत्रों (सीएचपी) के माध्यम से इसका हस्‍तांतरण, संचालन और वितरण काफी आसान हो गया है। खदान की निचली परतों में डूबी हुई कोयले की परतों को पंपिंग बढ़ाकर फिर से उत्पादन में लाया जा रहा है, जबकि आंतरिक ढुलाई सड़कों की मरम्मत का काम पूरी तेजी से चल रहा है।

बयान में आगे कहा गया कि शुष्क मौसम शुरू होने के साथ ही, डंप और बेंच की स्थिरता से संबंधित भू-तकनीकी चिंताएं और बारिश के दौरान बढ़ने वाले सुरक्षा जोखिम काफी हद तक कम हो गए हैं, जिससे कार्यबल बिना किसी बाधा के ग्राउंड जीरो पर काम कर पा रहा है। कोयले के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए, सीआईएल की सहायक कंपनियों ने इस कम मांग वाले समय का उपयोग अपने सीएचपी-साइलो तंत्र को बढ़ाने के लिए किया है, और शुष्क मौसम के आने के साथ ही लोडिंग पॉइंट और यार्ड पर रेल पटरियों को साफ किया जा रहा है। एनसीएल और एसईसीएल जैसी कंपनियों ने भी अतिरिक्त क्रशिंग क्षमता का निर्माण किया है जो निकट भविष्य में काफी उपयोगी साबित होगी।

--आईएएनएस

एबीएस

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