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कर्नाटक सरकार ने सूखे को गंभीरता से नहीं लिया, किसानों से माफी मांगें सीएम : एएस पाटिल नदहल्ली

कर्नाटक सरकार ने सूखे को गंभीरता से नहीं लिया, किसानों से माफी मांगें सीएम : एएस पाटिल नदहल्ली
कर्नाटक सरकार ने सूखे को गंभीरता से नहीं लिया, किसानों से माफी मांगें सीएम : एएस पाटिल नदहल्ली

बेंगलुरु, 28 सितंबर (आईएएनएस)। पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एएस पाटिल नदहल्ली ने सोमवार को कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि वे सूखे की स्थिति को गंभीरता से लेने में नाकाम रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान किसानों के बारे में अपनी टिप्पणियों के लिए लोगों से माफी मांगें।

बेंगलुरु में भाजपा के प्रदेश कार्यालय, जगन्नाथ भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए नदहल्ली ने कहा कि सूखे पर चर्चा के लिए बुलाया गया विशेष सत्र केवल एक औपचारिकता मात्र था। न तो मुख्यमंत्री और न ही ज्यादातर विधायकों ने इस चर्चा को गंभीरता से लिया।

उन्होंने कहा कि राज्य गंभीर सूखे का सामना कर रहा है। कम बारिश की वजह से मानसून की फसलें प्रभावित हुई हैं और अगर मानसून के बाद पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो हालात और खराब हो सकते हैं। नदहल्ली ने आरोप लगाया कि न तो राजस्व मंत्री और न ही मुख्यमंत्री ने किसानों को इस संकट से निपटने के उपायों के बारे में कोई स्पष्ट सलाह दी।

उन्होंने कहा, "सिर्फ आठ से दस विधायकों ने, जिनमें आलंद के विधायक बीआर पाटिल भी शामिल थे, सूखे के मुद्दे पर गंभीरता से बात की। जब किसान भारी संकट का सामना कर रहे हैं, तब विधायकों ने इस चर्चा में उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जितनी जरूरी थी।"

नदहल्ली ने कहा कि विधायकों को बिना किसी पार्टी की राजनीति के सूखे पर चर्चा करनी चाहिए थी और तटीय कर्नाटक, मलनाड, मैसूर-कर्नाटक और कित्तूर-कर्नाटक इलाकों पर इसके अलग-अलग असर को उजागर करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अलग-अलग इलाकों के हिसाब से बचाव के उपायों पर चर्चा करने में नाकाम रही।

उन्होंने कहा, “इस साल का सूखा अलग और बहुत गंभीर है। यह हाइड्रोलॉजिकल सूखा (पानी की कमी वाला सूखा) है। पहले के सूखे ज्यादातर खेती तक ही सीमित रहते थे। नेता मौजूदा हालात की गंभीरता को समझने में नाकाम रहे हैं। झीलें सूख गई हैं और जमीन के नीचे पानी का स्तर गिर गया है, जबकि मवेशियों के लिए पानी जमा करके इस्तेमाल किया जा रहा है।”

सरकार की सूखा राहत घोषणा पर नदहल्ली ने किसानों के लिए घोषित 2,500 रुपए की मदद की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब मीडिया ने पूछा कि क्या 2,500 रुपए बहुत कम हैं, तो जवाब को नजरअंदाज कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा कि चावल दिया गया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह चावल दिया था। उन्होंने कहा कि बिजली दी जा रही है। किसान उस बिजली का इस्तेमाल एयर-कंडीशंड कमरों में सोने के लिए नहीं कर रहे हैं। बिजली भी समय पर नहीं दी जाती है। अक्सर यह रात 2 या 3 बजे दी जाती है, जिससे किसानों को अपनी जान जोखिम में डालकर खेतों में जाना पड़ता है।”

नदहल्ली ने आरोप लगाया कि सेशन के दौरान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाषण में किसानों की चिंता नहीं दिखी और कहा कि शिवकुमार ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलों के बजाय बेंगलुरु के बारे में ज्यादा बात की। उन्होंने उन पर उत्तरी कर्नाटक के प्रति सौतेले व्यवहार का आरोप भी लगाया और कहा कि जब से शिवकुमार जल संसाधन मंत्री बने हैं, सिंचाई परियोजनाएं रुकी हुई हैं।

जल संसाधनों के मामले में, नदहल्ली ने कहा कि सरकार को जमीन अधिग्रहण से जुड़े लंबित कानूनी मुद्दों को सुलझाना चाहिए और दावा किया कि कृष्णा नदी का पानी कोलार तक भी पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र भीमा और कृष्णा नदियों पर बनी परियोजनाओं के जरिए पानी का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कर्नाटक के हिस्से पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कैबिनेट के कामकाज पर सरकार के खर्च पर सवाल उठाए, जबकि किसानों को सिर्फ 2,500 रुपए दिए जा रहे हैं।

उन्होंने पूछा, “सरकार कैबिनेट पर करोड़ों रुपए खर्च करती है, लेकिन किसानों को राहत के तौर पर सिर्फ 2,500 रुपए देती है। जब लोग मुश्किल में हों तो मंत्रियों और मुख्यमंत्री को सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल क्यों करना चाहिए?”

एएस पाटिल नदहल्ली ने कहा कि सरकार को किसानों के लिए अपने रेवेन्यू खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा देने का प्रस्ताव पास करना चाहिए था, जिससे हर प्रभावित किसान को 50,000 रुपए का मुआवजा मिल सकता था।

उन्होंने केंद्र की किसान सम्मान योजना का भी जिक्र किया और बताया कि केंद्र सरकार किसानों को हर साल 10,000 रुपए देती है। उन्होंने याद दिलाया कि बीएस येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री रहते हुए बाढ़ के दौरान रेवेन्यू अकाउंट से फंड जारी किए गए थे और सिंचाई तथा बागवानी फसलों के लिए मदद दी गई थी।

नदहल्ली ने मांग की कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार किसानों के बारे में अपनी अपमानजनक टिप्पणियों के लिए लोगों से माफी मांगें।

इस मौके पर भाजपा किसान मोर्चा के राज्य महासचिव एचसी कालमुरुदप्पा, राज्य उपाध्यक्ष भारती मल्लिकार्जुन और गुरुलिंगनगौड़ा, तथा राज्य सचिव आर. राजेश मौजूद थे।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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