Samachar Nama
×

सियांग जलविद्युत परियोजना पर पारदर्शिता और संवाद पर जोर: सीएम पेमा खांडू

सियांग जलविद्युत परियोजना पर पारदर्शिता और संवाद पर जोर: सीएम पेमा खांडू
सियांग जलविद्युत परियोजना पर पारदर्शिता और संवाद पर जोर: सीएम पेमा खांडू

ईटानगर, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने रविवार को 11,200 मेगावाट की इस परियोजना पर पारदर्शिता और खुले संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री ने रविवार को प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट (पीएफआर) पर सर्वदलीय विधायकों की बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम (एआईटीएफ) और विभिन्न सामुदायिक संगठनों (सीबीओ) के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक कर परियोजना पर चर्चा की।

सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री खांडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्थानीय लोगों की आशंकाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सियांग घाटी के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

एक अन्य पोस्ट में मुख्यमंत्री ने कहा कि सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट को लेकर फैली गलत सूचनाओं और गलतफहमियों के कारण लोगों में आशंकाएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि तथ्यों, पारदर्शिता और खुले संवाद के माध्यम से सूचना के इस अंतर को दूर करना जरूरी है। खांडू ने बताया कि उन्होंने एआईटीएफ और सामुदायिक संगठनों के साथ बैठक कर परियोजना पर चर्चा की और पूरे अरुणाचल प्रदेश में जागरूकता फैलाने के सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने पर विचार किया। उन्होंने कहा कि लोगों को परियोजना, इसके रणनीतिक महत्व और इससे जुड़ी चिंताओं को समझने के लिए सटीक जानकारी मिलनी चाहिए।

इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार और शनिवार को ईस्ट सियांग जिले के मुख्यालय पासीघाट में हुई हिंसा के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की दो कंपनियां अरुणाचल प्रदेश भेजी हैं। इनमें लगभग 250 जवान शामिल हैं। यूनाइटेड तानी काउंसिल (यूटीसी) ने भी रविवार को प्रस्तावित परियोजना का विरोध कर रहे लोगों के साथ खुले संवाद की अपील की। संगठन के अध्यक्ष बामांग ताजी और महासचिव न्यादार लोया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने सियांग बेसिन के दो दौरे किए हैं। इस दौरान परियोजना का विरोध कर रहे लोगों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर उनकी चिंताओं को समझने का प्रयास किया गया।

इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री खांडू ने पासीघाट में तोड़फोड़, लूटपाट और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर चिंता जताई थी। प्रस्तावित परियोजना के विरोध में सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में विभिन्न संगठनों ने 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। शुक्रवार और शनिवार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने ईस्ट सियांग जिले में राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) के एक कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी। इसके अलावा, दो राजनीतिक नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की गई। इनमें राज्य भाजपा अध्यक्ष का आवास भी शामिल है। पासीघाट में प्रदर्शनकारियों की ओर से कथित तौर पर पथराव किए जाने के बाद 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।

मुख्यमंत्री ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यह जरूरी है कि प्रदर्शन कानून के दायरे में रहें और उनसे संपत्ति को नुकसान न पहुंचे तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित न हो। उन्होंने पासीघाट में हुई घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सभी वर्गों से शांति बनाए रखने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की अपील की।

एसयूएमपी को लेकर उठ रही चिंताओं पर मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार सभी संगठनों, संघों और संबंधित पक्षों के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि परियोजना के संभावित लाभों, प्रतिकूल प्रभावों और स्थानीय समुदायों की आशंकाओं सहित सभी पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जा सकता है। प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना के विरोध में शुक्रवार को आदि बाने केबांग यूनाइटेड, एसयूएमपी प्रभावित क्षेत्र युवा संघ, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम की युवा शाखा और आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी ने संयुक्त रूप से 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था।

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story