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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को चुनावी एजेंडा बना लिया है: सुकांत मजूमदार

कोलकाता, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनावी एजेंडा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल 1946 या उससे भी पहले की स्थिति में लौट रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को चुनावी एजेंडा बना लिया है: सुकांत मजूमदार

कोलकाता, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने रविवार को तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनावी एजेंडा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंगाल 1946 या उससे भी पहले की स्थिति में लौट रहा है।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान, मजूमदार ने इस बात पर जोर दिया कि जिन राज्यों में एसआईआर कराया जा रहा है, वे सभी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्य नहीं हैं।

केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि कहीं भी कुछ गलत नहीं हुआ।

पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समस्या केवल एक राज्य में हो रही है। इसलिए स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि क्या समस्या एसआईआर में है या यह राज्य में?

मुख्यमंत्री बनर्जी को दोषी ठहराते हुए मजूमदार ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बंगाल में एसआईआर को चुनावी मुद्दा बना दिया है। वह भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती हैं।

तृणमूल कांग्रेस अक्सर चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाती रही है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री मजूमदार ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से चुनाव कराता है। तृणमूल कांग्रेस स्वतंत्र प्रशासन की आदी नहीं है। तृणमूल के शासन में प्रशासन तृणमूल का सेवक बन जाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर तृणमूल के पास चुनाव आयोग के खिलाफ कोई ठोस सबूत या जानकारी होती, तो अदालत उनके पक्ष में फैसला सुनाती।

उन्होंने मालदा कांड का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया गया था।

मजूमदार ने कहा कि बंगाल की तृणमूल कांग्रेस के गुंडों को भारत के संविधान की शक्ति दिखानी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि बंगाल 1946 या उससे पहले की स्थिति में वापस जा रहा है। नए जिन्ना आ रहे हैं। 1946 के बाद बंगाल का विभाजन हुआ; मुझे नहीं पता अब क्या होगा।

इसके अलावा, भाजपा नेता ने बांग्लादेश के साथ बंगाल की खुली सीमा के कारण अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाया।

--आईएएनएस

एमएस/

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