केरल के भविष्य के विकास को दिशा देगा ‘नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम’: मुख्यमंत्री
तिरुवनंतपुरम, 1 जनवरी (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार आने वाली पीढ़ियों की आकांक्षाओं के अनुरूप केरल के विकास पथ को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में ‘नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम’ की अहम भूमिका होगी, जिसका उद्देश्य नीतियों और विकास प्राथमिकताओं के निर्धारण में आम लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की दृष्टि केरल को एक उपभोक्ता राज्य से बदलकर ऐसा वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की है, जो दुनिया को वस्तुएं और सेवाएं उपलब्ध करा सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास तभी सार्थक होगा जब उसका लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे। विकास के फलों का समान रूप से वितरण सुनिश्चित करना सरकार की मूल जिम्मेदारी है।
विजयन ने शासन में नागरिकों की भागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के पास अपनी जीवन परिस्थितियों और आकांक्षाओं से उपजा एक विशिष्ट दृष्टिकोण होता है।
उन्होंने कहा, “लोगों के विचारों को सुनना, उन्हें समेकित करना और उसी के अनुरूप परियोजनाओं की योजना बनाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है।”
मुख्यमंत्री द्वारा शुरू किया गया ‘नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम’ केरल के भविष्य के विकास को लेकर जनता से सुझाव और विचार व्यवस्थित रूप से एकत्र करने के लिए तैयार किया गया है।
विजयन के अनुसार, यह पहल सरकार को क्षेत्र-विशेष की विकास जरूरतों की पहचान करने में मदद करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि विकास योजनाएं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हों, न कि एक ही ढांचे में सभी पर थोप दी जाएं।
इस कार्यक्रम के तहत नए रोजगार के अवसरों के सृजन, प्रस्तावित विकास परियोजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को लेकर भी जनता से फीडबैक लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे सरकार यह आकलन कर सकेगी कि कल्याणकारी योजनाएं वास्तविक स्थानीय जरूरतों के अनुरूप लाभार्थियों तक पहुंच रही हैं या नहीं, और जहां भी कमी होगी, उसे दूर किया जा सकेगा।
‘नव केरल’ की परिकल्पना को सशक्त करने का एक अहम माध्यम बताते हुए विजयन ने राज्य के लोगों से इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सामूहिक आकांक्षाओं को ठोस नीतिगत कदमों में बदलने के लिए व्यापक जनसहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा, “केरल का भविष्य उसके लोगों के साथ संवाद के जरिए ही बनाया जाना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता नागरिकों की रचनात्मक सहभागिता पर निर्भर करेगी।
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