बंगाल: हस्ताक्षर विवाद मामले में सीआईडी ने टीएमसी विधायकों के हैंडराइटिंग सैंपल मांगे
कोलकाता, 2 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के कथित हस्ताक्षर विवाद मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अदालत से कुछ विधायकों के हस्तलेखन (हैंडराइटिंग) नमूने लेने की अनुमति मांगी है। अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
सीआईडी ने बैंकशाल कोर्ट में आवेदन दाखिल कर टीएमसी विधायक बहारुल इस्लाम, सुभाशीष दास और अरूप रॉय के हस्तलेखन नमूने एकत्र करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है।
मामले की जांच के लिए सीआईडी ने डीआईजी रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। यह मामला विधानसभा सचिव की ओर से हेयर स्ट्रीट थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सामने आया था, जिसमें कुछ टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगतियों का आरोप लगाया गया था। इसी शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस के साथ मिलकर सीआईडी जांच कर रही है।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले को लेकर स्पीकर को लिखित शिकायत इन्हीं दोनों विधायकों ने सौंपी थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने हेयर स्ट्रीट थाने में मामला दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि पुलिस मंत्री होने के नाते उन्होंने मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच में सीआईडी को शामिल करने का निर्देश दिया।
दरअसल, विधानसभा चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होने के बाद टीएमसी के सामने विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के चयन को लेकर प्रक्रियागत जटिलताएं उत्पन्न हो गई थीं।
6 मई को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में विधायकों ने हाथ उठाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया था कि विधानसभा में नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन का फैसला ममता बनर्जी करेंगी।
इसके बाद टीएमसी ने सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की घोषणा की थी।
पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र विधानसभा को भेजा गया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। विधानसभा सचिवालय का कहना था कि संसदीय दल के नेता और पदाधिकारियों का चुनाव संसदीय दल की औपचारिक बैठक में होना चाहिए था, जिसका पालन नहीं किया गया।
इसके बाद 19 मई को कालीघाट में एक और बैठक बुलाई गई, जहां विधायकों से 6 मई की बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। कुछ विधायकों का आरोप है कि उनसे पुरानी कार्यवाही पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिससे विवाद पैदा हुआ।
जांच के दौरान सीआईडी पहले ही नयना बंद्योपाध्याय, कुणाल घोष, तापस माइती और बहारुल इस्लाम के आवास पर जाकर पूछताछ कर चुकी है।
सीआईडी ने सोमवार को अभिषेक बनर्जी को भी पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पेश होने में असमर्थता जताई। मामले की जांच जारी है।
--आईएएनएस
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