चीनी वीजा घोटाला: दिल्ली हाईकोर्ट के एक और जज ने कार्ति चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
नई दिल्ली, 23 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट के जज गिरीश कथपालिया ने शुक्रवार को कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस याचिका में कार्ति पी. चिदंबरम ने चीनी वीजा घोटाले मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। यह इस मामले में तीसरी बार है जब किसी जज ने खुद को सुनवाई से अलग किया है।
क्रिमिनल रिवीजन याचिका पर जस्टिस गिरीश कथपालिया ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इसे सुनने से मना कर दिया। इससे पहले जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने भी याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान चिदंबरम की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि कांग्रेस नेता के खिलाफ ऐसे अपराध के लिए आरोप तय किए गए हैं, जिसका आरोप उन पर लगाया ही नहीं गया था।
कार्ति पी. चिदंबरम ने कहा, "यह बिना सबूत का मामला है। मुझे इसमें फंसाने की कोशिश की जा रही है।" हालांकि जस्टिस कथपालिया ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि मैं इसे सुन पाऊंगा।"
इसके बाद, सिंगल-जज बेंच ने निर्देश देते हुए कहा, "क्रिमिनल साइड के इंचार्ज जज के आदेशों के अधीन इस मामले को 28 जनवरी को किसी दूसरी बेंच के सामने लिस्ट किया जाए।"
चिदंबरम ने 23 दिसंबर, 2025 को एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 2011 में चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने में कथित अनियमितताओं के संबंध में आपराधिक साजिश और एक सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के आरोप तय किए गए थे।
कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोप तय किए गए, जबकि आरोपी चेतन श्रीवास्तव को बरी कर दिया गया।
सीबीआई के अनुसार, यह मामला 2011 में चीनी नागरिकों के वीजा के दुरुपयोग से संबंधित कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जो गृह मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन था।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि पंजाब में एक पावर प्लांट के निर्माण के दौरान लगभग 250 चीनी श्रमिकों के वीजा को निर्धारित सीमा से अधिक समय तक इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई थी। ये आरोप वेदांता समूह से जुड़ी कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) पर केंद्रित हैं, जो पंजाब के मनसा में एक पावर प्रोजेक्ट लगा रही थी।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि टीएसपीएल ने बेल टूल्स लिमिटेड को 50 लाख रुपए की अवैध रिश्वत दी, जिसे भास्कररमन तक पहुंचाया गया, ताकि चीनी नागरिकों के लिए वीजा अप्रूवल और रिन्यूअल नियमों से अधिक संख्या में कराए जा सकें।
एजेंसी ने आगे दावा किया है कि यह कथित रिश्वत उस समय गृह मंत्रालय से अप्रूवल हासिल करने के लिए दी गई थी, जब कार्ति चिदंबरम के पिता पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे।
--आईएएनएस
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