अमेरिका का पूरा ध्यान ईरान पर, इधर चीन की पनडुब्बी से परमाणु-सक्षम मिसाइल लॉन्च पर बढ़ी चिंता
वेलिंगटन, 19 जुलाई (आईएएनएस)। हाल ही में चीनी पनडुब्बी से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल के प्रक्षेपण का समय जितना ध्यान आकर्षित करना चाहिए था, उतना नहीं कर पाया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में उलझा हुआ है, जिससे इस घटनाक्रम पर अपेक्षित स्तर की निगरानी और चर्चा नहीं हो सकी।
एशिया मीडिया सेंटर की एक रिपोर्ट में कहा गया, "इस परीक्षण के समय पर जितनी गहन जांच और ध्यान दिया जाना चाहिए था, उतना नहीं दिया गया। फरवरी के अंत से अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में व्यस्त है। चीन के इस प्रक्षेपण वाले सप्ताह में यह संघर्ष और भी तेज हो गया, जब वॉशिंगटन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के बाद ईरान के दर्जनों ठिकानों पर हमले किए। पिछले कई महीनों से अमेरिका का ध्यान, उसकी सैन्य क्षमता और कूटनीतिक संसाधन खाड़ी क्षेत्र में जारी इस संघर्ष में केंद्रित रहे हैं।"
रिपोर्ट एशिया मीडिया सेंटर की है, जो न्यूजीलैंड के पत्रकारों को एशिया से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों की राय और संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराने वाला एक संसाधन केंद्र है।
लेखिका दिव्या मल्होत्रा का कहना है कि सिर्फ इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि चीन ने मौका देखकर यह परीक्षण किया। बीजिंग का कहना है कि यह उसके सालाना सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था।
मल्होत्रा ने लिखा, "यह परीक्षण ऐसे समय हुआ जब चीन के परमाणु संकेतों का गंभीर जवाब देने की क्षमता रखने वाला सबसे बड़ा देश यानी अमेरिका पूरी तरह दूसरे मोर्चे पर व्यस्त था। टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली में रणनीतिक मामलों पर नजर रखने वाले लोगों ने इस बात पर जरूर ध्यान दिया होगा।"
मल्होत्रा ने कहा कि इससे प्रशांत क्षेत्र की चिंता कम नहीं होती। उन्होंने लिखा, "दक्षिण प्रशांत परमाणु-मुक्त क्षेत्र के भीतर किसी मिसाइल का गिरना सबसे पहले न्यूजीलैंड के अपने रणनीतिक पड़ोस का मामला है। इस परीक्षण से पहले भी इस पूरे क्षेत्र में बढ़ती परमाणु अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई थी।"
रिपोर्ट में कहा गया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इसमें सितंबर 2024 में चीन द्वारा प्रशांत महासागर में किया गया अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण भी याद दिलाया गया। यह 44 साल में पहली बार था जब चीन ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ऐसा परीक्षण किया। इसके बाद दिसंबर 2024 में जमीन में बने साइलो-बेस्ड आईसीबीएम परीक्षण भी किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, "इन सभी घटनाओं से साफ पता चलता है कि चीन अब सिर्फ सीमित और गुप्त परमाणु क्षमता रखने वाले देश की तरह नहीं रह गया है। वह अपना परमाणु भंडार बढ़ा रहा है, उसे और मजबूत बना रहा है और अब उसे खुले तौर पर दुनिया के सामने दिखाने में भी ज्यादा सहज हो गया है।"
मल्होत्रा के अनुसार, यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि चीन अब अपने परमाणु हथियारों को पहले की तरह सिर्फ गुप्त रूप से विकसित नहीं कर रहा, बल्कि खुले तौर पर उनकी क्षमता भी दिखा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, "अगर चीन के तेजी से बढ़ते पनडुब्बी बेड़े को भी साथ में देखा जाए, तो यह परीक्षण सिर्फ एक बार की ताकत दिखाने वाली कार्रवाई नहीं लगता। बल्कि यह लगातार समुद्र में परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों की तैनाती की दिशा में उठाया गया एक सोचा-समझा कदम दिखाई देता है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन कई वर्षों से ऐसी लगातार समुद्री परमाणु गश्त करते रहे हैं।"
--आईएएनएस
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