राज्यों के वित्त आयोगों को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम, केंद्र सरकार सोमवार को जारी करेगी नई रिपोर्ट
नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। भारत में राजकोषीय विकेंद्रीकरण को अधिक प्रभावी और साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में सोमवार को "राज्य वित्त आयोगों के लिए डेटासेट संबंधी समिति" की रिपोर्ट जारी की जाएगी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन इस रिपोर्ट का विमोचन करेंगे। इस दौरान पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
रिपोर्ट जारी होने के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार डेटा-आधारित नीतिनिर्माण और साक्ष्य-आधारित वित्तीय शासन पर मुख्य भाषण देंगे।
वे बताएंगे कि सशक्त स्थानीय स्वशासन और समावेशी विकास के लिए विश्वसनीय डेटा और तथ्यों पर आधारित नीतियां कितनी महत्वपूर्ण हैं।
यह रिपोर्ट राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक आंकड़ों और सूचनाओं का एक व्यवस्थित एवं व्यापक खाका प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट में डेटा की उपलब्धता बढ़ाने, उसके मानकीकरण, विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) तथा स्थानीय स्तर पर वित्तीय विश्लेषण के लिए संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाने संबंधी व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
सरकारी बयान के अनुसार, यह रिपोर्ट राज्य सरकारों, राज्य वित्त आयोगों, संवैधानिक संस्थाओं, आर्थिक शोधकर्ताओं और भारत में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण तथा स्थानीय सार्वजनिक वित्त को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहे सभी हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज साबित होगी।
संविधान के अनुच्छेद 243-आई के तहत गठित राज्य वित्त आयोग पंचायत राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने और स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के बंटवारे के सिद्धांत तय करने के लिए सिफारिशें देने वाले प्रमुख संवैधानिक निकाय हैं।
मंत्रालय के अनुसार, राज्य वित्त आयोगों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां प्रभावी और विश्वसनीय तरीके से निभाने के लिए स्थानीय निकायों के वित्त, जनसंख्या, बुनियादी ढांचे, सेवा वितरण और परिसंपत्ति प्रबंधन से जुड़े विश्वसनीय, समयबद्ध और विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता होती है।
पंचायती राज मंत्रालय ने यह समिति नवंबर 2024 में आयोजित "विकास के लिए वित्तीय हस्तांतरण" विषयक वित्त आयोग सम्मेलन के दौरान उठाई गई चिंताओं के बाद गठित की थी।
यह सम्मेलन 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष की अगुवाई में आयोजित किया गया था, जिसमें विभिन्न विभागों और एजेंसियों से व्यापक आंकड़े प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों की गुणवत्ता और समयबद्धता को प्रभावित करने वाली एक बड़ी चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया था।
सरकार का मानना है कि इस रिपोर्ट की सिफारिशें लागू होने से राज्य वित्त आयोगों को बेहतर डेटा उपलब्ध होगा, जिससे स्थानीय निकायों के लिए अधिक सटीक और प्रभावी वित्तीय सिफारिशें तैयार की जा सकेंगी और देश में वित्तीय विकेंद्रीकरण को नई मजबूती मिलेगी।
--आईएएनएस
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