केंद्र ने प्रतिबंधित ड्रोन और जीपीएस जैमर बेचने पर 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को भेजा नोटिस
नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने शुक्रवार को कहा कि उसने ड्रोन सहित प्रतिबंधित वायरलेस ट्रांसमिटिंग उपकरणों को सूचीबद्ध करने और बिक्री के लिए पेश करने के लिए 6 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया है।
जिन छह ई-कॉमर्स कंपनियों को नोटिस भेजा गया है, उनमें एवरसे, इंडियामार्ट, एक्सबूम, जावियट एयरोस्पेस, एयरवन रोबोटिक्स और मैवरिक ड्रोन्स एंड टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, इन ऑनलाइन कंपनियों द्वारा 'एंटी-ड्रोन सिस्टम', 'ड्रोन जैमर' और 'जीपीएस जैमर' बेचे जा रहे थे, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और अन्य लागू दूरसंचार एवं व्यापार नियंत्रण कानूनों का कथित उल्लंघन है।
बयान में कहा गया है कि ड्रोन जैमर और सिग्नल जैमिंग उपकरण भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 के तहत नियंत्रित होते हैं। इन पर दूरसंचार विभाग (डीओटी) और वायरलेस प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूपीसी) द्वारा सख्त लाइसेंस और नियामकीय नियंत्रण लागू है।
सीसीपीए ने संबंधित कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे उपकरणों की खरीद या आयात का स्रोत, आयात लाइसेंस की प्रतियां, चालान और संबंधित दस्तावेज, नियामकीय स्वीकृति/अनुमोदन की प्रतियां, वाणिज्यिक बिक्री की कानूनी आधार और पिछले दो वर्षों में बेची गई यूनिट्स की संख्या सहित खरीदारों का पूरा विवरण उपलब्ध कराएं।
बयान में कहा गया है कि ऐसे प्रतिबंधित उपकरणों का आयात विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 और डीजीएफटी की अधिसूचनाओं के तहत नियंत्रित होता है। आम तौर पर इस तरह के उपकरण केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को कानूनी स्वीकृति के बाद ही अनुमति दी जाती है।
सीसीपीए ने पहले भी ई-कॉमर्स कंपनियों को वायरलेस जैमर की अवैध बिक्री और सुविधा उपलब्ध कराने के खिलाफ सलाह जारी की थी।
उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 के नियम 4 के तहत मार्केटप्लेस कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे उचित सावधानी बरतें और सभी लागू कानूनों का पालन सुनिश्चित करें।
बिना वैधानिक अनुमति की पुष्टि किए प्रतिबंधित जैमिंग उपकरणों की बिक्री या उसे बढ़ावा देना भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885, वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 और विदेशी व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत दंडात्मक कार्रवाई को आकर्षित कर सकता है।
--आईएएनएस
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