Samachar Nama
×

केंद्र ने ई-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने की खबरों को किया खारिज: रिपोर्ट

केंद्र ने ई-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने की खबरों को किया खारिज: रिपोर्ट
केंद्र ने ई-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने की खबरों को किया खारिज: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने ई-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने की खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल ई-20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में यदि ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो वह केवल वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी सत्यापन के आधार पर ही होगा। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि ई-20 पेट्रोल को लेकर लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह ईंधन पिछले ढाई वर्षों से अधिक समय से व्यापक परीक्षण और मूल्यांकन के बाद देश में इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्मों पर अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के कारण वाहनों के प्रदर्शन और माइलेज पर असर पड़ने संबंधी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। वर्तमान में देश में करीब 20 करोड़ पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन और लगभग 20 लाख पेट्रोल आधारित चारपहिया वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं।

जुलाई की शुरुआत में केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रण को लेकर 10 बिंदुओं का विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय सुरक्षा मानकों पर आधारित है।

सरकार ने इस दावे को भी गलत बताया कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल वही अतिरिक्त चावल इस्तेमाल किया जाता है, जो देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतें पूरी होने के बाद उपलब्ध होता है।

सरकार ने यह भी बताया कि आधुनिक एथेनॉल डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है। साथ ही अधिकांश यूनिट्स में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) तकनीक अपनाई जा रही है, जिससे पानी का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) किया जाता है।

सरकार के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में अब मक्का की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में एथेनॉल आपूर्ति का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मक्का से तैयार किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि धान की तुलना में मक्के की खेती में काफी कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसी कारण किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी बढ़ाया गया है।

सरकार ने यह दावा भी खारिज किया कि ई-20 कोई नया या अप्रयुक्त ईंधन है। सरकार के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग दुनिया के कई देशों में दशकों से सफलतापूर्वक किया जा रहा है और भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भी इसी वैश्विक अनुभव और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर आगे बढ़ाया गया है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags