सीबीआई कोर्ट ने बैंक लोन फ्रॉड के लिए पूर्व बैंक अधिकारी और निजी कंपनी के प्रमुख को सात साल की सुनाई सजा
चेन्नई, 30 जून (आईएएनएस)। विशेष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने बैंक लोन फ्रॉड मामले में एक पूर्व बैंक कर्मचारी और निजी कंपनी के प्रमुख को सात साल की सजा सुनाई है। इस फ्रॉड में फर्जी तरीके से कुछ हाउसिंग लोन जारी किए गए थे, जिससे सरकारी क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 5.29 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। यह जानकारी मंगलवार को एजेंसी की ओर से दी गई।
इसके साथ, विशेष सीबीआई अदालत ने मामले से जुड़े होने के कारण एक निजी फर्म पर जुर्माना भी लगाया है।
सीबीआई की ओर से जारी बयान के मुताबिक,सोमवार को अदालत ने चेन्नई में बैंक लोन फ्रॉड मामले में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ट्रिपलिकेन ब्रांच के तत्कालीन सीनियर मैनेजर दीपक वी. मेनन को दोषी ठहराया और उन्हें सात साल की सख्त कैद और 65,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
बयान में कहा गया कि अदालत ने 'श्री शास्त्रु एसोसिएट्स कदान्थेत्ती प्राइवेट लिमिटेड' के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बी. शिवगणेशन को भी सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई, साथ ही 1.17 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। इस मामले में कंपनी पर भी 26,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया है।
यह मामला सीबीआई ने 29 अप्रैल, 2009 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 2006 और 2007 के बीच जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर धोखाधड़ी से 28 हाउसिंग लोन मंजूर किए गए और बांटे गए।
जांच के दौरान, सीबीआई ने पाया कि धोखाधड़ी वाले लेन-देन की वजह से फरवरी 2010 तक बकाया राशि 5.29 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई थी।
जांच पूरी होने के बाद, एजेंसी ने 30 जून 2010 को चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इन आरोपियों में बैंक अधिकारी मेनन, शिवगणेशन, कंपनी और एक प्राइवेट व्यक्ति एस. वैद्यनाथन शामिल थे।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान वैद्यनाथन की मौत हो गई और उनके खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई।
सबूतों की जांच और दलीलें सुनने के बाद, सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बाकी आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई।
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