यूएनएससी सीट के लिए कैरिकॉम करेगा भारत का समर्थन, एफएमएम बैठक में किया वादा
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को बताया कि न्यूयॉर्क में बुधवार को 81वीं यूएनजीए (संयुक्त राष्ट्र महासभा) से इतर भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) में वैश्विक स्तर पर अपने संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और सूरीनाम के विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सहयोग मंत्री मेल्विन डब्ल्यू. जे. बौवा ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की। यह बैठक नवंबर 2024 में गुयाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैरिकॉम साझेदारों की अध्यक्षता में हुई दूसरे भारत-कैरिकॉम शिखर सम्मेलन की फॉलो-अप बैठक थी।
बैठक के दौरान, कैरेबियाई देशों के 15-सदस्यीय कैरिकॉम समूह के सह-अध्यक्ष ने यूएनएससी के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने के फैसले से अवगत कराया।
भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) में बारबाडोस, डोमिनिका, बहामास, गुयाना, जमैका, सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइन्स, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, हैती, सेंट लूसिया, सेंट किट्स एंड नेविस, एंटीगुआ और बारबुडा के विदेश मंत्रियों; ग्रेनाडा के वित्त मंत्री; बेलीज के विदेश मामलों के मंत्रालय के सीईओ और कैरिकॉम की महासचिव कार्ला नताली बार्नेट ने भाग लिया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस बैठक से जुड़ी जानकारी एक बयान जारी कर दी। बताया, "बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत और कैरिकॉम देशों के बीच सहयोग में हुई लगातार प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। दोनों पक्षों ने राजनीतिक जुड़ाव को गहरा करने; व्यापार और निवेश बढ़ाने; कृषि और खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु लचीलेपन और ऊर्जा सहयोग में सहयोग पर चर्चा की।"
बयान में आगे कहा गया, "कैरिकॉम साझेदारों ने इस क्षेत्र में भारत की मदद और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग पर चर्चा की। वे संयुक्त राष्ट्र में सुधार, जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ-साथ आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों जैसे वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम जारी रखने पर सहमत हुए।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने कैरिकॉम नेताओं को उनके भरोसे और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और भरोसा दिलाया कि भारत 'ग्लोबल साउथ' की एक मजबूत आवाज बनेगा।
बैठक के बाद, विदेश मंत्री जयशंकर ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, "भारत ने इस बात पर जोर दिया कि हमें खासकर आर्थिक, डिजिटल एवं आवागमन के क्षेत्रों में अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहिए।"
विदेश मंत्री ने आगे कहा, "जिन छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) और त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाओं के लिए भारत ने प्रतिबद्धता जताई थी, उनमें से कई कैरेबियाई देशों में पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ में अभी काम जारी है।"
उन्होंने बताया कि भारत ने अंग प्रतिरोपण एवं कृत्रिम अंग लगाने के लिए शिविर आयोजित किए हैं, कुछ कैरिकॉम साझेदार देशों को ‘हीमोडायलिसिस’ इकाइयां उपहार में दी हैं और कॉम्पैक्ट चिकित्सा उपकरण ‘भीष्म क्यूब’ इकाइयां उपलब्ध कराई हैं।
जयशंकर ने कैरिकॉम देशों से भारत द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण के अवसरों का उपयोग करने का भी आग्रह किया और उनकी रुचि वाले क्षेत्रों में उनके अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश की।
कैरिबियन कम्युनिटी संगठन को आमतौर पर कैरिकॉम कहा जाता है। इसके तीन देशों, सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना में भारतीय मूल के लोगों की काफी आबादी है। बाकी देशों की तरह, भारत का भी उपनिवेश बनने का इतिहास रहा है।
कैरिकॉम देशों को भारत की मदद का जिक्र करते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि इससे उस इलाके में सोलर पावर लगाने को बढ़ावा मिला है। उन्होंने इन देशों से 'इंटरनेशनल सोलर अलायंस' और 'ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस' में शामिल होने पर विचार करने का भी अनुरोध किया।
--आईएएनएस
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