कैबिनेट ने नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के अपग्रेड और आधुनिकीकरण को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) द्वारा एमआईएल (मिहान इंडिया लिमिटेड) को पट्टे पर दी गई भूमि की लीज अवधि को 6 अगस्त, 2039 तक आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इससे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल (पीपीपी) मॉडल के तहत डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के हस्तांतरण और दीर्घकालिक विकास का मार्ग खुल गया है।
मंत्रिमंडल ने बयान में कहा कि इस निर्णय के बाद से एमआईएल वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से 30 वर्षों के लिए नागपुर हवाई अड्डे का लाइसेंस रियायतग्राही, अर्थात् जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) को दिया जा सकेगा। यह नागपुर हवाई अड्डे के लिए नागपुर में मल्टी-मोडल इंटरनेशनल कार्गो हब और एयरपोर्ट (मिहान) परियोजना के तहत क्षेत्रीय विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वर्ष 2009 में एएआई और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (एमएडीसी) द्वारा 49:51 के इक्विटी अनुपात में एक संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) - एमआईएल का गठन किया गया था। हालांकि एएआई की हवाई अड्डे की संपत्तियां वर्ष 2009 में हवाई अड्डे के संचालन के लिए एमआईएल को हस्तांतरित कर दी गई थीं, लेकिन भूमि सीमांकन संबंधी मुद्दों के कारण लीज डीड में देरी हुई। बाद में, एएआई की भूमि 6 अगस्त 2039 तक एमआईएल को लीज पर दी गई है।
वर्ष 2016 में एमआईएल ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत हवाई अड्डे के संचालन के लिए एक भागीदार की पहचान हेतु वैश्विक निविदा जारी की। जीएमआर एयरपोर्ट्स लिमिटेड (जीएएल) 5.76 प्रतिशत के राजस्व हिस्से के साथ उच्चतम बोलीदाता के रूप में उभरी। बाद में इसे संशोधित करके सकल राजस्व का 14.49 प्रतिशत कर दिया गया।
इसके बाद, एमआईएल ने मार्च 2020 में बोली प्रक्रिया रद्द कर दी। जीएएल ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में इस रद्द करने को चुनौती दी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी जीएएल के पक्ष में फैसला सुनाया। 27 सितंबर, 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार, एमआईएल ने 8 अक्टूबर, 2024 को अन्य संयुक्त उद्यम, जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (जीएनआईएएल) के साथ रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए।
सरकार ने बयान में कहा कि चरणबद्ध विकास के तहत इसकी अंतिम क्षमता 30 मिलियन यात्रियों को प्रतिवर्ष संभालने की होगी, जिससे यह मध्य भारत के प्रमुख हवाई अड्डों में से एक बन जाएगा। यह परिवर्तन न केवल विदर्भ क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, बल्कि इसके आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करेगा। इससे माल ढुलाई क्षमता में भी बड़ी वृद्धि होगी।
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