श्मशान विवाद: तमिलनाडु के इरोड में दो दलित पुरुषों को दंडवत प्रणाम करने पर मजबूर किया गया
इरोड, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के इरोड के पेरमपल्ली गांव में एक बुजुर्ग दलित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर हुए विवाद के चलते उनके समुदाय के दो सदस्यों को आर्थिक बहिष्कार की धमकी के बाद उच्च जाति के ग्रामीणों के चरणों में गिरने पर मजबूर किया गया। इस संबंध में पुलिस ने शनिवार को जानकारी दी।
थिंगलूर पुलिस ने दो व्यक्तियों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया है। अपमान का यह मामला तब सार्वजनिक ध्यान में आया जब दो पुरुषों को दूसरों के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए दिखाने वाला एक वीडियो वायरल हुआ।
यह विवाद 5 अक्टूबर को तब शुरू हुआ जब अनुसूचित जाति के ग्रामीण 90 वर्षीय समुदाय के सदस्य के शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले गए। पुलिस के अनुसार, बुजुर्ग व्यक्ति की मृत्यु वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों के कारण हुई थी।
कुछ उच्च जाति के ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार में बाधा डाली, जिससे तनावपूर्ण टकराव हुआ। मृतक के समुदाय के सदस्यों द्वारा अंतिम संस्कार करने की कोशिश के दौरान विवाद छिड़ गया।
पुलिस ने बताया कि यह टकराव तब और बढ़ गया जब उच्च जाति के सदस्यों ने दलित ग्रामीणों को चेतावनी दी कि उन्हें इलाके में रोजगार नहीं दिया जाएगा।
अंतिम संस्कार विवाद के दौरान काम से बेदखल करने की धमकी का इस्तेमाल उन पर दबाव डालने के लिए किया गया था। बाद में, दो दलित पुरुषों को आर्थिक बहिष्कार की धमकी देकर उच्च जाति के ग्रामीणों के पैरों में गिरने के लिए मजबूर किया गया।
अपमान का कथित वीडियो सामने आने से टकराव और अंतिम संस्कार से जुड़ी परिस्थितियों पर व्यापक ध्यान गया। अंततः पुलिस सुरक्षा में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों ने अंतिम संस्कार की निगरानी की। उनकी उपस्थिति ने समुदाय को बाधा और टकराव के बाद अंतिम संस्कार करने में सक्षम बनाया।
थिंगलूर पुलिस ने पेरुंदुरई के राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए गुरुवार देर रात मामला दर्ज किया। शिकायत के आधार पर घटना से जुड़े दो आरोपियों के खिलाफ कानून की धाराएं लगाई गईं। पुलिस ने बताया कि अवरोध, धमकियों और जबरन दंडवत प्रणाम के मामले में जांच जारी है।
आरोपों में समुदाय के लोगों को कब्रिस्तान तक पहुंचने से रोकना और विवाद के दौरान रोजगार संबंधी धमकियों का इस्तेमाल करना शामिल है।
सूत्रों ने इस घटना का कारण इलाके में व्याप्त जातिगत भेदभाव को बताया। इस टकराव ने दलित ग्रामीणों पर डाले गए दबाव को उजागर किया है, जब वे समुदाय के एक बुजुर्ग सदस्य को दफनाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप अंततः अंतिम संस्कार के लिए पुलिस सुरक्षा और आधिकारिक निगरानी की आवश्यकता पड़ी।
--आईएएनएस
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