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मध्य प्रदेश : बुरहानपुर के केले को मिला जीआई टैग, 18 हजार किसानों के लिए खुशखबरी

भोपाल/नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। मिठास और गुणवत्ता के लिए मशहूर बुरहानपुर के केले (बुरहानपुर केला) को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिला है। यह उपलब्धि यहां के हजारों केला किसानों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
मध्य प्रदेश : बुरहानपुर के केले को मिला जीआई टैग, 18 हजार किसानों के लिए खुशखबरी

भोपाल/नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। मिठास और गुणवत्ता के लिए मशहूर बुरहानपुर के केले (बुरहानपुर केला) को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिला है। यह उपलब्धि यहां के हजारों केला किसानों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

इस जीआई टैग के लिए जनवरी 2024 में खकनार कृषि विकास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने आवेदन किया था। बुरहानपुर को मध्य प्रदेश में सबसे अधिक केला उत्पादन करने वाला जिला माना जाता है। यही नहीं, यहां प्रदेश की एकमात्र केला मंडी भी स्थित है, जिससे यह क्षेत्र लंबे समय से केले के कारोबार का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

जिले में फैले हजारों बागान हर साल बड़ी मात्रा में केले का उत्पादन करते हैं। यहां के केले अपनी खास मिठास, स्वाद और गुणवत्ता के कारण पूरे देश में लोकप्रिय हैं। खासकर उत्तर भारत में इनकी मांग काफी अधिक रहती है। इसके अलावा खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) में भी बुरहानपुर के केले की लगातार मांग बनी हुई है।

अब जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी। इससे उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। साथ ही, नकली और मिलते-जुलते उत्पादों से भी इस विशेष किस्म की सुरक्षा हो सकेगी।

बुरहानपुर जिले में वर्तमान में करीब 18,640 किसान केला खेती से जुड़े हुए हैं। ये किसान लगभग 26,120 हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती करते हैं। इस विशाल क्षेत्र से हर साल करीब 18,28,400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका फायदा कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भी मिलेगा।

बुरहानपुर में पहले से ही केला आधारित प्रसंस्करण उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत यहां 55 से अधिक केला प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इन इकाइयों में केले से विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद और स्नैक्स तैयार किए जाते हैं।

अब जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बुरहानपुर के केले की मिठास दुनिया के और अधिक देशों तक पहुंचेगी।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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