केंद्र ने शहरी क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 2014 से बजट आवंटन 10 गुना बढ़ाया : वरिष्ठ अधिकारी
भुवनेश्वर, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने रविवार को कहा कि वर्ष 2014 के बाद से शहरी क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन 10 गुना बढ़ गया है। भारतीय शहरों के विकास को गति देने के लिए स्मार्ट सिटीज मिशन, अमृत, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन और शहरी आजीविका मिशन जैसी कई बड़ी योजनाओं के माध्यम से व्यापक प्रयास शुरू किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल और बस परिवहन प्रणालियों में भी लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपए का भारी निवेश किया गया है।
दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए पूर्व कैबिनेट सचिव गौबा ने नीति आयोग की ग्रोथ हब पहल के बारे में जानकारी दी। उन्होंने शहरों को विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए 2025-26 के बजट में घोषित एक लाख करोड़ रुपए के अर्बन चैलेंज फंड का जिक्र किया। साथ ही, इस वर्ष के बजट में सात शहरी आर्थिक क्षेत्रों के लिए पांच वर्षों में प्रत्येक को 5,000 करोड़ रुपए आवंटित किए जाने की बात कही।
उन्होंने आगे कहा कि सेवाओं की बेहतर आपूर्ति और नागरिकों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शहरों की सरकारों को वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना आवश्यक है।
नीति आयोग और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट 'प्रभावी शहरी शासन की दिशा में आगे बढ़ना' का जिक्र करते हुए उन्होंने शहरों में पांच साल के कार्यकाल वाले सीधे निर्वाचित महापौरों की व्यवस्था लागू करने, मेयर-इन-काउंसिल प्रणाली शुरू करने और समय पर नगर निकाय चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की।
गौबा ने कहा कि 74वें संविधान संशोधन के अनुरूप राज्यों को शहरी स्थानीय निकायों को सभी 18 कार्य सौंपने चाहिए। इनमें मास्टर प्लान तैयार करना, जलापूर्ति, अग्निशमन सेवाएं और यातायात प्रबंधन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानियों से शहरों का प्रभावी शासन नहीं किया जा सकता। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कदम उठाने के लिए शहरों की सरकारों के पास पर्याप्त अधिकार और संस्थागत क्षमता होनी चाहिए। इससे ही नागरिकों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी।
गौबा ने कहा कि नगर निकायों का राजस्व अब भी कम है और संपत्ति कर तथा उपयोगकर्ता शुल्क की वसूली में सुधार करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त आयोग से शहरी स्थानीय निकायों को मिलने वाले अनुदान में पिछली राशि की तुलना में दोगुने से अधिक वृद्धि हुई है और उनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, राज्यों से शहरों को मिलने वाली धनराशि अब भी कम है।
उन्होंने कहा कि राज्य वित्त आयोगों का नियमित रूप से गठन किया जाना चाहिए और शहरी स्थानीय निकायों को पर्याप्त वित्तीय हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
शहरी नियोजन और आवास के मुद्दे पर गौबा ने मौजूदा नियोजन व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने भूमि की उपलब्धता सीमित करने और आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए लागत बढ़ाने वाले प्रतिबंधात्मक फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) तथा भवन निर्माण नियमों में सुधार की अपील की।
उन्होंने भूमि की उपलब्धता बढ़ाने और आवास के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों की लागत कम करने के लिए मिश्रित भूमि उपयोग, परिवहन केंद्रों के आसपास विकास और भूमि एकत्रीकरण को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
गौबा ने प्रवासी श्रमिकों, औद्योगिक मजदूरों, विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों के लिए किफायती किराये के आवासों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने राज्यों से किराये के मकानों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट अपनाने का आग्रह किया।
गौबा ने कहा कि राज्य नए नगर निगम कानून लागू करके इन सभी सुधारों को अमल में ला सकते हैं। उन्होंने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से शहरी मिशनों के तहत मिलने वाली सहायता को सुधारों से जोड़कर इनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की शहरी विकास क्षमता को साकार करने तथा विकसित राज्य और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शहरों की सरकारों को सशक्त बनाना आवश्यक है।
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