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हंतावायरस क्रूज शिप से आए ब्रिटिश यात्रियों को अलग रखा गया

लंदन, 11 मई (आईएएनएस)। हंतावायरस संक्रमण से प्रभावित क्रूज शिप एमवी होंडियस से निकाले गए 20 ब्रिटिश नागरिकों को ब्रिटेन लौटने के बाद अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ब्रिटिश प्रशासन ने निगरानी और सुरक्षा उपायों को और सख्त कर दिया है।
हंतावायरस क्रूज शिप से आए ब्रिटिश यात्रियों को अलग रखा गया

लंदन, 11 मई (आईएएनएस)। हंतावायरस संक्रमण से प्रभावित क्रूज शिप एमवी होंडियस से निकाले गए 20 ब्रिटिश नागरिकों को ब्रिटेन लौटने के बाद अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ब्रिटिश प्रशासन ने निगरानी और सुरक्षा उपायों को और सख्त कर दिया है।

ये सभी यात्री पहले मैनचेस्टर पहुंचे, जहां से उन्हें बस के जरिए नॉर्थ-वेस्ट इंग्लैंड के मर्सीसाइड स्थित एरो पार्क अस्पताल ले जाया गया। यहां उन्हें 72 घंटे तक मेडिकल निगरानी में रखा जाएगा। स्थानीय एनएचएस अधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि सभी यात्रियों को 'प्रबंधित नैदानिक ​​परिवेश' में रखा गया है, जहां उनकी जांच और मेडिकल परीक्षण किए जाएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक अगर इन यात्रियों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता, तो उन्हें घर जाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि इसके बाद भी उन्हें अगले 42 दिनों तक सेल्फ आइसोलेशन में रहना होगा। ब्रिटिश सरकार ने साफ किया है कि एमवी होंडियस से लौटने वाले सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को कुल 45 दिनों तक निगरानी और आइसोलेशन में रखा जाएगा। इसके अलावा उन लोगों की भी पहचान की जा रही है, जो संक्रमित या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आए हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि एमवी होंडियस से जुड़े इस हंतावायरस प्रकोप में अब तक कम से कम आठ पुष्टीकृत या संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि तीन लोगों की मौत की खबर है।

इस बीच ब्रिटिश सरकार ने दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित ब्रिटेन के दूरदराज क्षेत्र ट्रिस्टन दा कुन्हा में भी एक विशेष सैन्य और मेडिकल टीम भेजी है। यहां एक ब्रिटिश नागरिक में हंतावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई थी।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 16 एयर असॉल्ट ब्रिगेड के छह पैराट्रूपर्स और दो सैन्य डॉक्टर पैराशूट के जरिए द्वीप पर उतारे गए। साथ ही ऑक्सीजन सिलेंडर और मेडिकल उपकरण भी एयरड्रॉप किए गए।

221 लोगों की आबादी वाला ट्रिस्टन दा कुन्हा दुनिया के सबसे दूर बसे इलाकों में गिना जाता है। यहां कोई एयरपोर्ट नहीं है और सामान्य तौर पर केवल समुद्री रास्ते से पहुंचा जा सकता है।

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इसे पहली ऐसी मानवीय सहायता मिशन बताया, जिसमें सैन्य मेडिकल टीम को पैराशूट के जरिए भेजा गया। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने कहा है कि आम जनता के लिए फिलहाल खतरा 'बहुत कम' है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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