Samachar Nama
×

ब्रिक्स व्यापारिक संस्थाओं ने महिला उद्यमिता, निवेश और व्यापार सहयोग को नई गति देने पर दिया जोर

ब्रिक्स व्यापारिक संस्थाओं ने महिला उद्यमिता, निवेश और व्यापार सहयोग को नई गति देने पर दिया जोर
ब्रिक्स व्यापारिक संस्थाओं ने महिला उद्यमिता, निवेश और व्यापार सहयोग को नई गति देने पर दिया जोर

नई दिल्ली, 13 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स की दो प्रमुख व्यापारिक संस्थाओं, ब्रिक्स वीमेन बिजनेस अलायंस (डब्ल्यूबीए) और ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल, ने रविवार को सदस्य देशों के बीच महिला उद्यमियों के लिए अधिक अवसर, आपसी व्यापार और निवेश में वृद्धि तथा गहरे कारोबारी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका कहना है कि इससे ब्रिक्स देशों की आर्थिक क्षमता को वास्तविक विकास और रोजगार सृजन में बदला जा सकेगा।

भारत की अध्यक्षता में प्रस्तुत 2026 वार्षिक रिपोर्ट के दौरान डब्ल्यूबीए की अध्यक्ष अवर्णा जैन ने कहा कि ब्रिक्स देशों की महिलाएं आज व्यवसाय स्थापित कर रही हैं, रोजगार पैदा कर रही हैं, नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला लक्ष्य महिलाओं को केवल भागीदारी तक सीमित न रखकर नेतृत्व की भूमिका तक पहुंचाना है।

जैन ने कहा, "जरूरत इस बात की है कि अधिक से अधिक महिला उद्यमी छोटे व्यवसायों से बड़े स्तर तक पहुंचें, स्थानीय सफलता को ब्रिक्स देशों के बड़े बाजारों तक ले जाएं और नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे बढ़ें।" उन्होंने कहा कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को केवल सामाजिक या क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि डब्ल्यूबीए की सिफारिशें महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने, पूंजी और नवाचार तक पहुंच बढ़ाने, महिलाओं द्वारा संचालित समाधानों के माध्यम से आर्थिक लचीलापन बढ़ाने तथा सफल मॉडलों को पूरे ब्रिक्स नेटवर्क में विस्तार देने पर केंद्रित हैं।

अवर्णा जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने 'महिला-नेतृत्व वाले विकास' को अपनी विकास यात्रा के केंद्र में रखा है और यह दृष्टिकोण ब्रिक्स देशों के लिए भी प्रेरणादायक हो सकता है।

वहीं, ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष जय श्रॉफ ने सदस्य देशों के बीच अधिक आर्थिक एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विशाल आर्थिक क्षमता, बड़े बाजार, प्राकृतिक संसाधन और तकनीकी क्षमताएं हैं, लेकिन अब आवश्यकता उन्हें अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की है।

उन्होंने कहा, "हमें एक-दूसरे के साथ अधिक व्यापार करना चाहिए, एक-दूसरे में अधिक निवेश करना चाहिए, मजबूत मूल्य शृंखलाएं विकसित करनी चाहिए, प्रौद्योगिकियां साझा करनी चाहिए और व्यवसायों के बीच नई साझेदारियां बनानी चाहिए।"

श्रॉफ ने बताया कि ब्रिक्स देशों की वास्तविक चुनौती क्षमता निर्माण नहीं, बल्कि मौजूदा क्षमता को अधिक अवसरों और विकास में बदलना है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें भारत की अध्यक्षता के चार प्रमुख स्तंभों लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के अनुरूप तैयार की गई हैं।

उन्होंने कहा कि लचीलापन अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है, नवाचार प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाता है, सहयोग विकास को गति देता है और स्थिरता दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करती है।

दोनों कारोबारी संस्थाओं ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच अधिक सक्रिय व्यापारिक भागीदारी, निवेश सहयोग और निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाए बिना समूह की पूर्ण आर्थिक क्षमता का लाभ नहीं उठाया जा सकता। उनका मानना है कि महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने, एमएसएमई को अवसर प्रदान करने और सीमा-पार व्यापारिक सहयोग को मजबूत करने से ब्रिक्स देशों में समावेशी और टिकाऊ विकास को नई गति मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags