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बिश्केक में पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमेसी': राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री ने एक ही गाड़ी में किया सफर

बिश्केक में पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमेसी': राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री ने एक ही गाड़ी में किया सफर
बिश्केक में पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमेसी': राष्ट्रपति पुतिन के साथ प्रधानमंत्री ने एक ही गाड़ी में किया सफर

बिश्केक, 31 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बिश्केक में मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जहां भारत-रूस संबंधों, यूक्रेन युद्ध और विश्व में शांति स्थापित करने को लेकर चर्चा हुई। इस बीच पीएम मोदी की 'कार डिप्लोमेसी' भी देखने को मिली।

दरअसल, बिश्केक में पीएम मोदी एक बार फिर से अपने मित्र और राष्ट्रपति पुतिन के साथ एक ही कार में बैठे नजर आए।

इससे पहले, दिसंबर 2025 में जब राष्ट्रपति पुतिन भारत के दौरे पर आए थे, तब पीएम मोदी उनका स्वागत करने के लिए दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। इस खास मौके पर दोनों ने एक ही कार से आगे के कार्यक्रम के लिए प्रस्थान किया था।

पीएम मोदी की कार डिप्लोमेसी रूसी राष्ट्रपति के अलावा, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम, जर्मन चांसलर, जॉर्डन प्रिंस अल हुसैन बिन अब्दुल्लाह II, सेशेल्स के राष्ट्रपति पेट्रिक हर्मिनी, जापान की वर्तमान पीएम सनाए तकाइची और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ भी देखने को मिली।

वहीं, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक से पहले भारत के प्रधानमंत्री ने संबोधन दिया। इस संबोधन के दौरान उन्होंने यूक्रेन युद्ध का जिक्र किया और शांति की ओर बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत शांति का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा।

उन्होंने कहा, "यूक्रेन के विषय पर भी हम चर्चा करते रहे हैं। पिछली बार भी जब हम मिले थे तो आपने विस्तार से मुझे जानकारी दी थी। भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और शांति के हर प्रयास के लिए आगे भी समर्थन करता रहेगा। युद्ध में बिताया एक-एक दिन मानवता को पीछे धकेलता है और शांति की तरफ बढ़ाया गया एक-एक कदम नई आशा और उमंगों से भर देता है।"

उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि हमें कभी न खत्म होने वाले युद्ध से युद्ध के अंत की दिशा में जाना ही होगा, जो मानवता की भलाई के लिए भी आवश्यक है। जल्द से जल्द सभी विषयों का शांतपूर्ण ढंग से समाधान हो, यही मानवता की पुकार और भारत का संदेश है। महात्मा गांधी की धरती और बुद्ध की धरती का एक ही संदेश है शांति का मार्ग।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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