बलूचिस्तान में हमलों में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मारने का दावा, बीएलएफ ने ली जिम्मेदारी
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले में कई सैन्य ठिकानों पर हमलों के दौरान 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों को मारने का दावा किया है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) के एक शिविर और अन्य सैन्य एवं पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।
बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलूच ने एक बयान में कहा कि संगठन के 'ऑपरेशन अलमास' के दौरान मारे गए लोगों में मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) का एक कैप्टन, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के अधिकारी और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (एसएसजी) के जवान शामिल हैं। उन्होंने दर्जनों अन्य कर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने का भी दावा किया। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' ने यह रिपोर्ट दी है।
ग्वाहराम बलूच के अनुसार, यह अभियान 22 अक्टूबर को शुरू हुआ था। इस दौरान संगठन ने एफडब्ल्यूओ शिविर के प्रवेश द्वार पर विस्फोटकों से भरे वाहन से आत्मघाती हमला किया। उनके दावे के मुताबिक, विस्फोट में मुख्य द्वार और आसपास के ठिकाने नष्ट हो गए, जिससे अन्य लड़ाकों को परिसर में प्रवेश करने का मौका मिला।
प्रवक्ता ने दावा किया कि एफडब्ल्यूओ परिसर में दाखिल होने के बाद लड़ाकों ने आईएसआई के एक कार्यालय पर धावा बोला, जहां एक अधिकारी और पांच अन्य कर्मियों की मौत हो गई। एक अन्य कार्यालय में हुई अलग मुठभेड़ में मिलिट्री इंटेलिजेंस के छह कर्मी मारे गए, जिनमें एक कैप्टन भी शामिल था। बयान के अनुसार, इसके बाद लड़ाकों ने कई मंजिलों वाली एक आवासीय बैरक को निशाना बनाया और इमारत के अंदर मोर्चा संभाल लिया। ग्वाहराम बलूच ने दावा किया कि बैरक में हुई लड़ाई के दौरान कुल 21 कर्मी मारे गए। उन्होंने कहा कि परिसर पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में पाकिस्तानी बलों ने रातभर नौ और मुठभेड़ों का सामना किया। इसके बाद मोर्टार और तोपों से गोलाबारी की गई।
बीएलएफ प्रवक्ता के मुताबिक, अगली सुबह अतिरिक्त सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ नया सैन्य अभियान चलाया गया, जिसे संगठन के लड़ाकों ने नाकाम कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान करीब 13 पाकिस्तानी कर्मी मारे गए और दो बख्तरबंद वाहन नष्ट कर दिए गए। बयान में यह भी दावा किया गया कि अभियान के दौरान लड़ाकों ने चार क्वाडकॉप्टर और दो निगरानी ड्रोन मार गिराए। इसके अलावा, संगठन की स्नाइपर टीम ने अभियान के दौरान छह पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मारने का दावा किया।
ग्वाहराम बलूच ने कहा कि एफडब्ल्यूओ और अन्य कथित विकास संस्थान वास्तव में पाकिस्तानी सेना के वाणिज्यिक और सैन्य अंग हैं, जिनका इस्तेमाल क्षेत्र के संसाधनों का दोहन करने, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की सुरक्षा करने और जनसांख्यिकी बदलने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि संगठन किसी बाहरी शक्ति या देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के नियंत्रण और क्षेत्र के समुद्री तट तथा प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन का विरोध करता है।
बीएलएफ प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि संगठन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी), रेको डिक, सैंदक और बलूचिस्तान में चल रही अन्य परियोजनाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि बलूच लोगों की सहमति के बिना पाकिस्तान में शुरू की जाने वाली किसी भी परियोजना पर हमले का खतरा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमलों से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी विदेशी संस्थानों की होगी। हालांकि, इन हमलों में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया कर्मियों के मारे जाने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
--आईएएनएस
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