मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर सागरिका घोष के दावों को अमित मालवीय ने बताया झूठ
नई दिल्ली, 23 मई (आईएएनएस)। भाजपा के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी और पश्चिम बंगाल सह-प्रभारी अमित मालवीय ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष पर तीखा हमला बोला। यह विवाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस दौरे को लेकर सागरिका घोष की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ।
अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट कर सागरिका घोष पर गलत जानकारी फैलाने और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की करीबी सागरिका घोष आदतन दुष्प्रचार फैलाने का काम करती हैं।
उन्होंने दावा किया कि “अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता स्थित मदर हाउस जाने” के अलावा सागरिका घोष का हर दूसरा बयान “साफ झूठ” है।
मालवीय ने कहा कि यह “जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से फैलाया गया दुष्प्रचार” है, जिसका उद्देश्य भारत सरकार की छवि खराब करना और लोगों को गुमराह करना है।
भाजपा नेता ने इसके बाद विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत मिशनरीज ऑफ चैरिटी की कानूनी स्थिति को लेकर तथ्यों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, “मिशनरीज ऑफ चैरिटी एफसीआरए के तहत पंजीकृत संस्था है और उसका एफसीआरए पंजीकरण अब भी सक्रिय है।”
मालवीय ने बताया कि संस्था का एफसीआरए पंजीकरण 31 दिसंबर 2026 तक वैध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संस्था की एफसीआरए स्थिति को लेकर फिलहाल कोई आवेदन लंबित नहीं है।
उन्होंने सागरिका घोष की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें “खुलेआम झूठ फैलाने और जवाबदेही से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”
मालवीय ने आरोप लगाया कि सागरिका घोष की टिप्पणियां “भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी कोशिश” हैं। उन्होंने उनके व्यवहार को “निंदनीय” बताते हुए कहा कि इसकी स्पष्ट रूप से आलोचना होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “एक सार्वजनिक पद पर रहते हुए और करदाताओं के पैसे से वेतन पाने वाली व्यक्ति होने के नाते सागरिका घोष को अपने बयानों और आचरण के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सागरिका घोष ने एक्स पर मार्को रुबियो के मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय दौरे को लेकर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “विदेश मंत्री मार्को रुबियो कोलकाता स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस पहुंचे और वहां की वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध मानवीय सेवाओं को सलाम किया।”
इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि “नरेंद्र मोदी सरकार की घोर पाखंडपूर्ण राजनीति सामने आ रही है।”
सागरिका घोष ने केंद्र सरकार को “ईसाई विरोधी” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक के जरिए मिशनरीज ऑफ चैरिटी को विदेशी सहायता लेने से रोका है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार चर्च की संपत्तियों को जब्त करने का रास्ता तैयार कर रही है, जिससे ईसाई संस्थाओं की मानवीय, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
सागरिका घोष ने अपने पोस्ट के अंत में कहा कि सरकार एक ओर ऐसे कदम उठा रही है और दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने मदर टेरेसा के संगठन को प्रदर्शित कर रही है।
--आईएएनएस
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