ओडिशा: बीजेडी ने राज्यसभा चुनाव में नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप, स्वतंत्र जांच की मांग की
भुवनेश्वर, 11 मई (आईएएनएस)। मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (बीजेडी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आरएस गोपालन से मुलाकात की।
यह मुलाकात भाजपा विधायकों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से दूसरा बैलेट पेपर जारी किए जाने के मामले में हुई। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान इन विधायकों द्वारा डाले गए दो वोटों को रद्द किया जाए।
बीजेडी विधायक दल के उप नेता प्रसन्ना आचार्य के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में दावा किया कि राज्यसभा चुनाव 2026 के दौरान जब मूल बैलेट पेपर पर पहले ही निशान लगाए जा चुके थे, तब भी ब्रह्मगिरि के विधायक उपासना मोहपात्रा और कलिकोट के विधायक पूर्ण चंद्र सेठी को गैर-कानूनी तरीके से दूसरे बैलेट पेपर जारी किए गए।
पार्टी ने लगातार आपत्तियां जताते हुए कहा कि मतदाताओं ने दूसरे बैलेट पेपर जारी करने की मांग करने से पहले ही अपने मूल बैलेट पेपर पर निशान लगा दिए थे। पार्टी की कड़ी आपत्तियों के बावजूद दूसरे बैलेट पेपर जारी कर दिए गए, जबकि परिस्थितियां 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 41 के तहत निर्धारित वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं।
बीजेडी ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक ने शुरू में दूसरे बैलेट पेपर जारी करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में इसकी अनुमति दे दी। इससे नियम 41 के तहत अपेक्षित वैधानिक संतुष्टि और 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के प्रावधानों के तहत इन बैलेट पेपरों को 'खराब बैलेट' मानने के लिए किसी भी कानूनी औचित्य के अभाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पार्टी ने ज्ञापन में दावा किया कि मतदान एजेंटों, चुनाव एजेंटों, अधिकृत एजेंटों, मतगणना एजेंटों, उम्मीदवारों और संसदीय प्रतिनिधियों द्वारा लगातार और कई स्तरों पर उठाई गई आपत्तियों से यह बात निस्संदेह साबित होती है कि इस मुद्दे को उसी समय एक गंभीर वैधानिक अनियमितता के रूप में देखा गया था, जो स्वयं चुनाव की पवित्रता को प्रभावित करती है।
जब मतदान प्रक्रिया चल रही थी, तब बीजेडी अध्यक्ष और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने मीडिया के सामने इस मुद्दे को उठाया और इस संबंध में अपनी शिकायत दर्ज कराई।
बाद में 18 मार्च को उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक ईमेल के माध्यम से औपचारिक रूप से भारत के चुनाव आयोग का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया। इसके बाद 28 अप्रैल को राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने एक विस्तृत ज्ञापन पेश किया, जिसमें उन्होंने तत्काल कानूनी दखल की मांग की।
ईसीआई ने इस ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए ओडिशा के सीईओ को निर्देश दिया कि वे बीजेडी के प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दें और उनकी शिकायतों को सुनें।
सीईओ से गुहार लगाते हुए बीजेडी ने अपने ज्ञापन में कहा कि ब्रह्मगिरि की विधायक उपासना महापात्रा और खल्लीकोट के विधायक पूर्ण चंद्र सेठी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवार दिलीप रे को दिए गए दो वोटों को खारिज किया जाए और उन वोटों को अमान्य घोषित किया जाए। पहली वरीयता वाले वोटों के आधार पर, दिलीप रे, दत्तेश्वर होता से पीछे रह जाते हैं, जिसके चलते ईसीआई को दत्तेश्वर होता को ही निर्वाचित घोषित करना चाहिए।
इसके अलावा, पार्टी ने सीईओ से यह भी आग्रह किया कि वे 16 मार्च को दर्ज की गई शिकायतों और 18 मार्च को बीजेडी अध्यक्ष द्वारा भेजे गए ईमेल पर की गई पूरी कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक करें।
इस क्षेत्रीय पार्टी ने सीईओ से यह भी मांग की कि वे इन घटनाओं से जुड़े चुनाव के सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें, संरक्षित करें और उनकी जांच करें। साथ ही, उन परिस्थितियों की विस्तृत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच करें जिनके तहत दूसरे मतपत्र जारी किए गए थे और यह निर्धारित करें कि क्या 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 41 का उल्लंघन हुआ था। इन रिकॉर्डों में मूल रद्द किए गए मतपत्र, मतपत्रों का हिसाब, काउंटरफॉयल, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट, मतदान रिकॉर्ड, मतगणना की कार्यवाही, सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग, तथा चुनाव आयोग के कर्मचारियों द्वारा की गई आधिकारिक फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी शामिल हैं।
--आईएएनएस
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