Samachar Nama
×

ओडिशा: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग, बीजेडी ने 8 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की

भुवनेश्वर, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजेडी) विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उप नेता प्रसन्ना आचार्य के नेतृत्व में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी से मुलाकात की और एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आठ पार्टी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई, जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है और सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ बयान दिए हैं।
ओडिशा: राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग, बीजेडी ने 8 विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग की

भुवनेश्वर, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजेडी) विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को उप नेता प्रसन्ना आचार्य के नेतृत्व में ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी से मुलाकात की और एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आठ पार्टी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई, जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है और सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ बयान दिए हैं।

यह मांग तब उठी जब इन आठ विधायकों पर आरोप लगा कि उन्होंने हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए सत्तारूढ़ पार्टी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया।

बीजेडी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इन विधायकों का यह कदम पार्टी के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है और यह दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आता है।

उन्होंने अपने लिखित ज्ञापन में विधानसभा अध्यक्ष से जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए इन सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की मांग की।

बीजेडी की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने अध्यक्ष को पत्र लिखकर आठ विधायकों की अयोग्यता की औपचारिक मांग की है।

उन्होंने कहा, ''इन आठ विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में पार्टी के निर्देशों के खिलाफ वोट दिया और मीडिया के सामने भी पार्टी विरोधी बयान दिए हैं। वे अब पार्टी में रहने के योग्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें निलंबित कर दिया गया है। हमने अध्यक्ष से उनकी सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है।''

इस बीच, प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और वरिष्ठ विधायक अरुण साहू ने कहा कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन और क्रॉस वोटिंग गंभीर अनुशासनहीनता है और यह संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 191 और दसवीं अनुसूची का हवाला दिया, जो दलबदल के आधार पर अयोग्यता से संबंधित है।

साहू ने कहा कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि पार्टी छोड़ देता है या उसके निर्देशों के खिलाफ काम करता है, जैसे व्हिप के खिलाफ वोट देना, तो इसे दलबदल माना जा सकता है।

उन्होंने कहा, ''यह सिर्फ वोटिंग का मामला नहीं है, बल्कि पार्टी अनुशासन और जनता के जनादेश का सवाल है। सार्वजनिक रूप से पार्टी लाइन के खिलाफ जाना यह दिखाता है कि उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है।''

उन्होंने 2024 में हिमाचल प्रदेश के छह विधायकों और 2017 में वरिष्ठ नेता शरद यादव के अयोग्य ठहराए जाने का उदाहरण भी दिया और कहा कि ऐसे मामलों में पहले भी कार्रवाई हुई है, इसलिए उन्हें विश्वास है कि विधानसभा अध्यक्ष कानून के अनुसार निर्णय लेंगी।

उन्होंने कहा, ''इस मामले में बीजेडी के आठ विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर बार-बार उसके फैसलों का उल्लंघन किया और सार्वजनिक रूप से पार्टी के खिलाफ बयान दिए, इसलिए उन्होंने स्वेच्छा से पार्टी सदस्यता छोड़ दी है। ऐसे में उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए, क्योंकि वे बीजू जनता दल के टिकट और उसके चुनाव चिह्न पर चुने गए थे।''

बता दें कि मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव में कुल 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिनमें बीजेडी के 8 (दो निलंबित विधायक समेत) और कांग्रेस के 3 विधायक शामिल थे। इससे भाजपा समर्थित उम्मीदवार दिलीप रे की जीत हुई थी।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

Share this story

Tags