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पश्चिम बंगाल: भूमि हड़पने के मामले में गिरफ्तार कारोबारी ने की सरकारी गवाह बनने की मांग

पश्चिम बंगाल: भूमि हड़पने के मामले में गिरफ्तार कारोबारी ने की सरकारी गवाह बनने की मांग
पश्चिम बंगाल: भूमि हड़पने के मामले में गिरफ्तार कारोबारी ने की सरकारी गवाह बनने की मांग

कोलकाता, 15 अगस्त (आईएएनएस)। भूमि हड़पने के मामले में गिरफ्तार कोलकाता के बिजनेसमैन और रियल एस्टेट प्रमोटर जॉय कामदार ने सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने के लिए केंद्रीय एजेंसी से संपर्क किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें इस साल की शुरुआत में जमीन हड़पने के कई गैर-कानूनी मामलों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

सूत्रों के मुताबिक, जॉय कामदार के वकील ने कोलकाता की स्पेशल पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) कोर्ट में एक औपचारिक अर्ज़ी भी दाखिल की है, जहां इस मामले की सुनवाई चल रही है।

अभी यह साफ नहीं है कि ईडी कामदार की अपील को मानेगी या कोर्ट उन्हें 'अप्रूवर' (सरकारी गवाह) का दर्जा देगी। स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने एजेंसी को इस प्रस्ताव पर अपना फैसला बताने के लिए 25 अगस्त तक का समय दिया है।

यह मामला कामदार, भूमि माफिया सरगना बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता के पूर्व पुलिस उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास से जुड़े अवैध भूमि-हथियाने वाले गठजोड़ पर केंद्रित है।

कामदार को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था, जबकि सिन्हा बिस्वास और पोद्दार को मई में हिरासत में लिया गया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि तीनों ने जमीन हड़पने की गतिविधियों के जरिए काफी अवैध धन अर्जित किया था।

ईडी ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने हवाला चैनलों के माध्यम से अवैध कमाई का लेन-देन किया। जांचकर्ताओं ने कामदार के मलेशिया, ब्रिटेन और दुबई में हवाला ऑपरेटरों के साथ संचार का पता लगाया और बाद में बीरभूम जिले के बोलपुर-शांतिनिकेतन क्षेत्र में कामदार और सिन्हा बिस्वास से जुड़ी महत्वपूर्ण अचल संपत्तियों का पता लगाया, जिन्हें बेहिसाब धन का उपयोग करके हासिल किया गया था।

यदि कामदार की याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष गोपनीय बयान दर्ज कराना होगा। इस प्रकार की गवाही अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूत कर सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कानून के तहत आरोपी व्यक्ति सरकारी गवाह बन सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया जटिल है और इसमें कई चरण शामिल हैं। जांच एजेंसी को अदालत की मंजूरी लेने से पहले प्रस्ताव और उसके कानूनी निहितार्थों का आकलन करना आवश्यक है।

अंतिम निर्णय पीठासीन न्यायाधीश के पास होता है, जिन्हें इस तरह का दर्जा देने से पहले कारणों को दर्ज करना होगा और सभी प्रासंगिक कानूनी पहलुओं पर विचार करना होगा।

--आईएएनएस

एसएके/वीसी

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