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भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट विवादित स्थल पर एमपी हाईकोर्ट के जजों के दौरे के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई करेगा। जिसमें धार जिले में लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
भोजशाला केस: सुप्रीम कोर्ट विवादित स्थल पर एमपी हाईकोर्ट के जजों के दौरे के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई करेगा। जिसमें धार जिले में लंबे समय से चले आ रहे भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कॉजलिस्ट के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा विपुल एम. पंचोली की बेंच एक अप्रैल को मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करेगी।

इस याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच की ओर से 16 मार्च को पारित आदेश को चुनौती दी गई है। उस आदेश में, अगली सुनवाई की तारीख से पहले विवादित भोजशाला परिसर का व्यक्तिगत निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया था और इस मामले में नियमित सुनवाई शुरू करने के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की गई थी।

मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी एसएलपी में यह तर्क दिया है कि उसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से पेश रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

इससे पहले, 16 मार्च को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने लंबी बहस सुनने के बाद टिप्पणी की थी कि भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर से जुड़े कई विवादों को देखते हुए, अगली सुनवाई से पहले वह खुद उस जगह का दौरा करेगी।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की अगुवाई वाली बेंच ने यह साफ कर दिया था कि निरीक्षण के दौरान किसी भी पक्ष को वहां मौजूद रहने की इजाजत नहीं होगी।

एमपी हाई कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को यह निर्देश भी दिया था कि वे एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर अपनी आपत्तियां, सुझाव और जवाब दो अप्रैल से पहले जमा करें। इसी दिन से इस मामले की नियमित सुनवाई होनी है।

एएसआई ने इस संरक्षित स्मारक का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे किया था। एएसआई ने यह संकेत दिया था कि मौजूदा ढांचे में पहले के मंदिर वास्तुकला की विशेषताएं मौजूद हैं। इस पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति जताई है।

यह विवाद भोजशाला परिसर के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर किए जा रहे विरोधी दावों पर आधारित है। जहां हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मूल रूप से एक मंदिर था, वहीं मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के निष्कर्षों और सर्वेक्षण के दौरान अपनाई गई कार्यप्रणाली को ही चुनौती दे दी है।

बता दें कि 22 जनवरी को पारित एक पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों समुदायों को इस स्थल पर अपनी-अपनी धार्मिक रीतियों का पालन करने की अनुमति दी थी। बसंत पंचमी की पूजा के लिए समय की कोई पाबंदी न रखते हुए, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि शुक्रवार की नमाज परिसर के भीतर ही एक अलग से निर्धारित क्षेत्र में दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच अदा की जाए।

शीर्ष अदालत ने सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और दोनों पक्षों से आग्रह किया था कि वे कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ सहयोग करें। इसके साथ ही विवादित स्थल पर धार्मिक अधिकारों के प्रयोग के लिए एक संतुलित रूपरेखा भी निर्धारित की थी।

--आईएएनएस

एसडी/डीएससी

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