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स्कूलों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए मिड डे मील लाभार्थियों की जांच करेगी पश्चिम बंगाल सरकार, होगी कार्रवाई

स्कूलों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए मिड डे मील लाभार्थियों की जांच करेगी पश्चिम बंगाल सरकार, होगी कार्रवाई
स्कूलों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए मिड डे मील लाभार्थियों की जांच करेगी पश्चिम बंगाल सरकार, होगी कार्रवाई

कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना में गड़बड़ी रोकने के लिए राज्य सरकार अब सख्त हो गई है। नबन्ना स्थित राज्य सचिवालय के निर्देश पर अलग-अलग जिलों के प्रशासन ने अचानक स्कूलों की जांच करने का फैसला लिया है।

जांच का मकसद यह पता लगाना है कि स्कूलों में जितने छात्र-छात्राएं वास्तव में पढ़ते हैं, क्या उतने ही बच्चों का नाम मिड-डे मील पोर्टल पर दर्ज है या नहीं।

राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया, "अगर जांच में पता चलता है कि किसी स्कूल ने मिड-डे मील पोर्टल पर छात्रों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई है, तो पहले संबंधित स्कूल प्रशासन (जिसमें प्रधानाध्यापक या प्रधानाध्यापिका शामिल हैं) को कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कानूनी प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।"

अधिकारी के मुताबिक, लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ स्कूल अधिकारी पोर्टल पर छात्रों की संख्या फुलाकर दिखा रहे हैं। कुछ जिलों के सरकारी स्कूल पहले ही इस मामले में दोषी पाए जा चुके हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पूर्वी मिदनापुर जिले के पटाशपुर-1 ब्लॉक का एक सरकारी स्कूल इसका उदाहरण है। यहां मिड-डे मील पोर्टल पर जितने छात्रों का नाम दिखाया गया था, वह असल संख्या से लगभग 10 गुना ज्यादा था।

शिकायत मिलने के बाद संबंधित बीडीओ ने खुद स्कूल में अचानक जांच की। जांच में असल छात्रों की संख्या और पोर्टल पर दर्ज संख्या में बड़ा अंतर पाया गया। इसके बाद स्कूल के प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

पश्चिम बंगाल में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय भी मिड-डे मील योजना में अनियमितताओं की कई शिकायतें सामने आई थीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त समीक्षा समिति ने पहले ही आरोप लगाया था कि अप्रैल से सितंबर 2022 के बीच पिछली ममता बनर्जी सरकार ने मिड-डे मील के लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर दिखाई थी। इससे करीब 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की वित्तीय गड़बड़ी हुई थी।

इसके अलावा पहले की सरकार पर खाने की गुणवत्ता से समझौता करने के भी आरोप लगे थे। कुछ सरकारी स्कूलों में छात्रों को सिर्फ चावल और नमक परोसा जाता था।

राज्य सचिवालय के अधिकारी ने कहा, "नई व्यवस्था इस योजना में ऐसी गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए दृढ़ है और इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।"

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस

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