बैंक ऑफ बड़ौदा ने यूएई के कारोबारी से 2,800 करोड़ रुपए वसूलने के लिए शुरू की प्रक्रिया
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। बैंक ऑफ बड़ौदा ने बुधवार को कहा कि वह यूएई के कारोबारी बीआर शेट्टी से 2,800 रुपए वसूलने के लिए भारत और यूएई में कोशिशें कर रहा है और उनके खिलाफ कई अदालती आदेश हासिल कर चुका है।
बैंक ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है, जब यूएई आधारित कंपनी एनएमसी हेल्थ के संस्थापक शेट्टी ने बैंक के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में केस दायर किया है और ग्रुप की कंपनियों से जुड़े कथित फ्रॉड के मामले में 15 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है।
वहीं, सरकारी बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वह अपने हितों की मजबूती से रक्षा करेगा।
स्टॉक एक्सचेंज में दी गई जानकारी में बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा, "बैंक को ऐसा कोई मुकदमा नहीं मिला है और बैंक उन दावों या आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता जिनकी अदालत में अभी तक जांच नहीं हुई है। जब बैंक को मुकदमे की सूचना मिलेगी, तो बैंक मजबूती से अपना पक्ष रखेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।"
बैंक ने यह भी बताया कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2021 में शेट्टी को अपनी संपत्ति का लेनदेन करने या उसे किसी और को ट्रांसफर करने से रोक दिया था। बाद में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में हुई कार्यवाही के दौरान शेट्टी ने कहा था कि वह दिवालिया हो चुके हैं और बैंक का बकाया नहीं चुका सकते।
बैंक ने आगे कहा कि शेट्टी ने पहले भी न्यूयॉर्क राज्य की सुप्रीम कोर्ट में बैंक के खिलाफ इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जिसे खारिज कर दिया गया था।
शेट्टी का आरोप है कि बैंक ऑफ बड़ौदा और उसके कई मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने एक ऐसे फ्रॉड में मदद की, जिसकी वजह से खाड़ी देशों में काम करने वाला हेल्थकेयर ग्रुप डूब गया।
एक समय गल्फ की सबसे बड़ी प्राइवेट हेल्थकेयर कंपनी रही एनएमसी को महीनों की फाइनेंशियल गड़बड़ियों के बाद 2020 में एडमिनिस्ट्रेशन के तहत लाया गया था। कंपनी ने 6.6 अरब डॉलर के कर्ज का खुलासा किया, जो पहले के 2.1 अरब डॉलर के अनुमान से कहीं ज्यादा था।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में बताई गई बातें अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (एडीजीएम) कोर्ट में चल रही कार्यवाही का भी हिस्सा थीं। इस कोर्ट में शेट्टी और एनएमसी हेल्थकेयर के पूर्व सीईओ प्रशांत मंगहट के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत तरीके से ट्रेडिंग और धोखाधड़ी वाली ट्रेडिंग के आरोपों पर फैसला सुरक्षित रखा गया था।
बैंक ने बताया कि एनएमसी ग्रुप के जॉइंट एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ समझौते के बाद उसके खिलाफ एडीजीएम की कार्यवाही रोक दी गई थी।
बैंक ने कहा कि जब तक कोई आदेश नहीं आता, संभावित नुकसान के लिए कोई प्रोविजन बनाने की जरूरत नहीं है।
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