बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी, मृतकों की कुल संख्या हुई 409
ढाका, 11 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी है। खसरे और उससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण 11 और लोगों की मौत हो गई है। इसके साथ ही इस प्रकोप से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 409 हो गई है।
स्थानीय मीडिया ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के हवाले से बताया कि मृतकों की ये संख्या रविवार तक के पिछले 24 घंटों में दर्ज की गईं।
डीजीएचएस ने बताया कि चार लोगों की मौत खसरे के कारण हुई इसकी पुष्टि हो चुकी है। इसके साथ ही 15 मार्च के बाद से खसरे से हुई पुष्ट मौतों की कुल संख्या 65 हो गई। वहीं, सात अन्य मृतक संख्या संदिग्ध मामलों से जुड़ी थीं, जिससे मौत का आंकड़ा बढ़कर 344 पहुंच गया।
बांग्लादेश के अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ के अनुसार, इसी 24 घंटे की अवधि में 1,503 नए संदिग्ध खसरा मरीज सामने आए, जिसके बाद 15 मार्च से अब तक कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 49,159 हो गई है। इनमें से 205 मामलों में खसरे की पुष्टि हुई, जिससे कुल पुष्ट मामलों की संख्या 6,819 तक पहुंच गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 मार्च के बाद से खसरे के लक्षणों वाले 34,909 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मार्च के मध्य से अब तक बांग्लादेश में 400 से अधिक लोगों की मौत के बाद एक रिपोर्ट में इस प्रकोप को “टाला जा सकने वाला संकट” बताया गया है। रिपोर्ट में पूर्व अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व मुहम्मद यूनुस कर रहे थे, से जवाबदेही तय करने की मांग की गई। आरोप है कि सरकार ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था तैयार किए एक प्रभावी वैक्सीन खरीद प्रणाली को समाप्त कर दिया।
‘द डेली स्टार’ में प्रकाशित संपादकीय रिपोर्ट में कहा गया, “दो दशकों तक बांग्लादेश में खसरा टीकाकरण कवरेज लगातार बढ़ता रहा और यह कम आय वाले देशों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मॉडल बन गया था। लेकिन पिछली अंतरिम सरकार की लापरवाही ने इस उपलब्धि को बर्बाद कर दिया।”
रिपोर्ट के अनुसार, 1998 से लागू ‘हेल्थ, पॉपुलेशन एंड न्यूट्रिशन सेक्टर प्रोग्राम’ को मार्च 2025 में बिना किसी उचित वैकल्पिक योजना के समाप्त कर दिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में वैक्सीन खरीद प्रक्रिया ठप हो गई, 14,000 से अधिक सामुदायिक क्लीनिकों में दवाओं की आपूर्ति घट गई और आपातकालीन भंडार भी खत्म हो गए और इस वजह से स्थिति और गंभीर हो गई।
अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, “जवाबदेही की कमी एक जांच समिति की मांग करती है, जिसे व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने का अधिकार हो। बच्चों की मौत बेहद दुखद है। जिन्होंने इस कार्यक्रम को खत्म किया, उन्हें हर मौत का जवाब देना होगा।”
--आईएएनएस
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