बांग्लादेश: भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था ने मंत्री हुमायूं कबीर की नियुक्ति को ‘असंवैधानिक’ बताया
ढाका, 25 अगस्त (आईएएनएस)। बांग्लादेश के भ्रष्टाचार निरोधक निगरानी संगठन ने मंगलवार को टेक्नोक्रेट कोटे के तहत विदेश मामलों के राज्य मंत्री के रूप में दोहरी नागरिकता वाले हुमायूं कबीर की नियुक्ति को असंवैधानिक करार दिया। संगठन ने बिना सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट किए पदभार ग्रहण करने के उनके फैसले पर सवाल उठाया।
एक बयान में, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) ने राज्य मंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी दोहरी नागरिकता की स्थिति के बारे में पत्रकारों के सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय, सवाल पूछकर जवाब देने से बचते रहे।
बांग्लादेशी अखबार 'द डेली स्टार' ने टीआईबी के कार्यकारी निदेशक इफ्तेखारुज्जमान के हवाले से कहा, "मूल सवाल यह है कि क्या उन्होंने राज्य मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करते समय अपनी विदेशी नागरिकता बरकरार रखी थी। जनहित से जुड़े इस तरह के स्पष्ट संवैधानिक सवाल का सीधे जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है।"
पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर देते हुए संगठन ने राज्यमंत्री से दोहरी नागरिकता पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया, जो उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद का मुख्य कारण है।
कई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए टीआईबी ने कहा कि विदेश मामलों के राज्य मंत्री कथित तौर पर विदेशी नागरिकता रखते हैं और संबंधित देश में सक्रिय राजनीति में भी शामिल रहे हैं।
टीआईबी के कार्यकारी निदेशक ने कहा, "जब किसी जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति से जनहित के किसी मामले पर सवाल पूछा जाता है, तो यह उम्मीद की जाती है कि वह सीधा और तथ्यपरक जवाब देगा। प्रासंगिक संवैधानिक और कानूनी सवालों का जवाब देकर और जरूरी सबूतों का खुलासा करके, मंत्री पारदर्शिता और जवाबदेही की एक मिसाल कायम कर सकते थे।"
उन्होंने कहा, "ऐसा करने के बजाय दोहरी नागरिकता पर खबर देने वाले मीडिया संस्थानों और इस मामले पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों से नाराजगी भरे और आक्रामक अंदाज में उल्टा सवाल करना एक राज्य मंत्री की गरिमा और जिम्मेदारी के लिहाज से शोभा नहीं देता। यह नैतिक रूप से अस्वीकार्य और बेहद चिंताजनक है।"
इस मामले को सरकार के लिए शर्मिंदगी भरा बताते हुए इफ्तेखारुज्जमान ने कहा कि राज्य मंत्री का यह रवैया स्वतंत्र मीडिया, अभिव्यक्ति की आजादी और स्वतंत्र पत्रकारिता के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, "जनहित से जुड़े जायज सवालों पर किसी जिम्मेदार सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति की आक्रामक प्रतिक्रिया न सिर्फ संबंधित पत्रकारों पर अनुचित और गैर-जरूरी दबाव डालती है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए भी खतरा पैदा करती है। इससे सत्ता में बैठे लोगों या सरकारी पदों पर मौजूद लोगों से जुड़े असहज मुद्दों पर पत्रकारों के लिए सवाल पूछना जोखिम भरा बन सकता है। इससे पत्रकारों में आत्म-सेंसरशिप या 'खौफ के माहौल' का खतरा भी बढ़ सकता है। आखिरकार, यह लोगों के जानने के हक को कमजोर करता है।"
टीआईबी के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि यह मामला विदेश मामलों के राज्य मंत्री जैसे बेहद महत्वपूर्ण सरकारी पद से जुड़ा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर इसके संभावित असर और बांग्लादेश के लिए "टाली जा सकने वाली साख को नुकसान" के खतरे को देखते हुए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
--आईएएनएस
केके/एबीएम

