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राहुल गांधी के समर्थन में सीपीआई (एम), कांग्रेस-वाम गठजोड़ पर भाजपा का निशाना

राहुल गांधी के समर्थन में सीपीआई (एम), कांग्रेस-वाम गठजोड़ पर भाजपा का निशाना
राहुल गांधी के समर्थन में सीपीआई (एम), कांग्रेस-वाम गठजोड़ पर भाजपा का निशाना

तिरुवनंतपुरम, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के महासचिव एम.ए. बेबी द्वारा राहुल गांधी की विदेश यात्रा का बचाव किए जाने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कांग्रेस और सीपीआई-एम के खिलाफ अपना पुराना आरोप फिर से दोहराने का मौका मिल गया है। केरल में दोनों दल कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी के रूप में साथ हैं।

केरल में ये दोनों पार्टियां एक-दूसरे की कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी हैं। एमए बेबी ने मंगलवार को राहुल गांधी की विदेश यात्रा के खिलाफ भाजपा के अभियान को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ भ्रम पैदा करने की कोशिश है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए इस आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने भारतीय राज्यों के दौरों की तुलना में विदेश यात्राएं कहीं ज्यादा की हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर यह आरोप भी लगाया कि जब मणिपुर जल रहा था, तब भी वे विदेश यात्रा पर गए थे।

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बेबी ने ऐसे बयानों के खिलाफ आगाह किया, जिनसे इंडी गठबंधन द्वारा आयोजित संयुक्त विरोध प्रदर्शनों के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन मिलकर इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहा है और हर पार्टी को यह तय करने का अधिकार है कि वह अपना आंदोलन किस तरह चलाना चाहती है।

हालांकि सीपीआई (एम) महासचिव की ये टिप्पणियां भाजपा के खिलाफ विपक्षी गठबंधन का बचाव करने के उद्देश्य से थीं, लेकिन इनसे एक पुराना राजनीतिक नारा भी फिर से सामने आ गया, जिसने केरल में दोनों ही पार्टियों को बार-बार परेशान किया है।

पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने भाजपा नेता के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कांग्रेस और सीपीआई (एम) के बीच के विरोधाभास को उजागर करने के लिए अक्सर 'केरल में कुश्ती, दिल्ली में दोस्ती' जैसे वाक्यांश का इस्तेमाल किया। यह भाजपा द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक जाना-पहचाना जुमला बन गया।

यह तर्क केरल की राजनीतिक वास्तविकताओं पर आधारित है, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ और सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाला एलडीएफ सत्ता के लिए एक-दूसरे के मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं।

विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान इनके नेता अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करते हैं, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये दोनों ही दल भाजपा का विरोध करने के लिए गठबंधन का हिस्सा बने हुए हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान केरल में प्रधानमंत्री मोदी सहित अपने राष्ट्रीय नेताओं के दौरों का इस्तेमाल भाजपा ने अक्सर इस विरोधाभास को उजागर करने और कांग्रेस तथा वाम दलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए किया है।

बेबी की हालिया टिप्पणियों से केरल में सीपीआई (एम) के रुख में किसी बदलाव का संकेत नहीं मिलता, हालांकि राष्ट्रीय विपक्षी गठबंधन की एकता को बचाने पर उनका जोर भाजपा को यह कहने का एक और मौका देता है कि राज्य में कांग्रेस और वाम दलों के बीच की तीखी प्रतिद्वंद्विता पर अक्सर राष्ट्रीय राजनीतिक मजबूरियां भारी पड़ जाती हैं।

इन दोनों दलों के सामने चुनौती यह बनी हुई है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग कैसे बनाए रखें, ताकि उनके विरोधी केरल में इसे उनके लिए एक राजनीतिक नुकसान में न बदल सकें।

अब केरल में भाजपा के मजबूत होने के साथ, खासकर एक लोकसभा और तीन विधानसभा सीटें जीतने के बाद, नायडू की बात को और बल मिला है। मंगलवार को राज्य भाजपा अध्यक्ष और विधायक राजीव चंद्रशेखर ने केरल के दो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे एक-दूसरे की मदद करने के लिए भीतर ही भीतर मिलीभगत कर रहे हैं।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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