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देश में 90 करोड़ लोगों के नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्ड होल्डर

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा लागू आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) ने देशभर में 90 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। यह जानकारी शनिवार को सरकार ने दी।
देश में 90 करोड़ लोगों के नाम आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट, उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कार्ड होल्डर

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा लागू आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) ने देशभर में 90 करोड़ आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर लिया है। यह जानकारी शनिवार को सरकार ने दी।

उत्तर प्रदेश ने 15.3 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट बनाकर सबसे आगे है। इसके बाद राजस्थान और महाराष्ट्र में प्रत्येक राज्य में 7.1 करोड़ अकाउंट, बिहार में 6.3 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 5.9 करोड़ अकाउंट बनाए गए हैं।

मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक ने भी इसमें अहम योगदान दिया है, जो पूरे देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को अपनाने की बात को दिखाता है।

यह उपलब्धि भारत की एक-दूसरे से जुड़ी, आपस में काम करने वाली और नागरिकों पर केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर बढ़ने की यात्रा में एक बड़ा कदम है। एबीडीएम के शुरू होने के बाद से ही आभा बनाने की प्रक्रिया में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष के आधार पर कुल आभा बनाने की संख्या 2021 में 14.7 करोड़ से बढ़कर 2022 में 30.4 करोड़ तक पहुंची। इसके बाद ये संख्या 2023 में 50.6 करोड़, 2024 में 72.2 करोड़ और 2025 में 84.5 करोड़ हो गई और 2026 में आभा ने 90 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया।

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बर्णवाल ने कहा कि 90 करोड़ से ज्यादा आभा का बनना, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में नागरिकों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और इकोसिस्टम से जुड़े साथियों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। आभा नागरिकों को उनकी अपनी स्वास्थ्य जानकारी तक सुरक्षित और उनकी सहमति पर आधारित पहुंच देकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे एबीडीएम को अपनाने का चलन गहराता जाएगा, आभा इलाज की निरंतरता को मुमकिन बनाएगा, कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करेगा और एक ज्यादा आसान, पारदर्शी और नागरिकों पर केंद्रित स्वास्थ्य सेवा देने वाली व्यवस्था को बढ़ावा देगा।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लद्दाख, लक्षद्वीप, और दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव ने पूरी तरह से लक्ष्य हासिल कर लिया है।

बनाए गए सभी आभा में से लगभग आधे महिलाओं के हैं, जो कुल आभा धारकों का 49.75 प्रतिशत हैं। यह महिलाओं को, खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित डिजिटल पहुंच देकर सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

आभा स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ पहले संपर्क बिंदु से ही इलाज की निरंतरता को बनाए रखने में मदद कर सकता है, जिसमें मां और बच्चे की देखभाल, टीकाकरण और दूसरी जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।

नागरिकों के लिए आभा अलग-अलग स्वास्थ्य सुविधाओं और एप्लिकेशन्स में बने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटली जोड़ने में मदद करता है। इससे उन्हें अपने मेडिकल दस्तावेजों को साथ लेकर चलने की जरूरत कम हो जाती है, और जब भी जरूरत हो और उनकी सहमति हो तो वे स्वास्थ्य सेवा देने वालों के साथ अपनी स्वास्थ्य जानकारी सुरक्षित रूप से शेयर कर सकते हैं।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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