ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने मध्य पूर्व के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियों को कम किया
कैनबरा, 17 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने बुधवार को इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित मध्य पूर्व के कई देशों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियों को कम कर दिया है।
विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा कि सरकार ने बहरीन, इजरायल, कुवैत, कतर और यूएई के लिए यात्रा से जुड़ी सलाह को सबसे ऊंचे लेवल 4 (यात्रा न करें) से घटाकर लेवल 3 (यात्रा करने की जरूरत पर दोबारा सोचें) कर दिया है। हालांकि, इजराइल के कुछ इलाके अभी भी लेवल 4 पर बने हुए हैं।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री पेनी कहा कि विदेश मामलों और व्यापार विभाग ने इन देशों में मौजूदा हालात को कम लेवल वाली चेतावनी के लिए सही माना है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई लोगों को गैर-जरूरी यात्रा टालते रहना चाहिए।
विदेश और व्यापार मामलों के सहायक मंत्री मैट थिसलथवेट के साथ एक संयुक्त बयान में वोंग ने कहा, "अगर आपको इन जगहों से होकर गुजरना पड़े, तो वहां कम से कम समय बिताए और गैर-जरूरी गतिविधियां न करें।"
ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए ईरान, इराक, लेबनान, फिलिस्तीन, सीरिया और यमन में लेवल चार की "यात्रा न करें" वाली चेतावनी लागू है, जबकि जॉर्डन, ओमान और सऊदी अरब के लिए लेवल तीन की चेतावनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान के साथ समझौता हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने की कोशिश करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, उन्होंने समझौता कराने में कतर की भूमिका की तारीफ की और उम्मीद जताई कि बातचीत का अगला चरण आसान होगा।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ द्विपक्षीय बैठक में बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि यह समझौता मध्य पूर्व में सप्ताहों के तनाव के बाद एक बड़ी कामयाबी है।
ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान के साथ समझौता कर लिया है, और यह सफल होना चाहिए। अब यह दूसरे चरण में जा रहा है, जो मुझे लगता है कि असल में आसान होगा। मैं पिछले हफ्ते उन पर हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था और हमने ऐसा दो बार किया। असल में, हम तीसरी बार भी ऐसा करने जा रहे थे, लेकिन हमें ऐसा नहीं करना पड़ा।"
अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि इस समझौते के तहत वॉशिंगटन ईरान को आर्थिक मदद देगा।
उन्होंने कहा, "वैसे, हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। कल जो अफवाह उड़ी थी, वह बेतुकी थी। हमारे पास कभी भी वहां जाकर कुछ करने का अधिकार है या अगर कोई कुछ करना चाहे तो। लेकिन ईरान में पैसा निवेश करने की हमारी कोई बाध्यता नहीं है।"
ट्रंप ने कहा कि इस समझौते का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर पाए।
--आईएएनएस
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