ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लौटाईं उत्तरी सोंग राजवंश की दो सांस्कृतिक धरोहरें
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को कैनबरा स्थित नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया (एनजीए) में आयोजित एक समारोह के दौरान चीन की दो सांस्कृतिक धरोहरों को वापस सौंप दिया। ये दोनों प्राचीन प्रतिमाओं के सिर हैं, जो उत्तरी सोंग राजवंश (960-1127) के समय के हैं।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, हस्तांतरण समारोह में चीन के राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत प्रशासन (एनसीएचए) के उप निदेशक तांग वेई, ऑस्ट्रेलिया में चीन के राजदूत लियू जिनसोंग और नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया के निदेशक निक मित्जेविच शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने विचार भी रखे।
लौटाई गईं दोनों धरोहरों में पहली योंग्यू समाधि से संबंधित एक सैन्य अधिकारी की प्रतिमा का सिर है, जबकि दूसरी योंगचांग समाधि से संबंधित एक नागरिक अधिकारी की प्रतिमा का सिर है। नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, चूना पत्थर से बनी ये दोनों कलाकृतियां मध्य चीन के हेनान प्रांत की हैं।
चीनी पक्ष ने कहा कि अपने मूल देशों से विस्थापित सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लौटाना सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने, दुनिया भर के लोगों के सांस्कृतिक अधिकारों और राष्ट्रीय भावनाओं का सम्मान करने तथा मानव सभ्यता की उपलब्धियों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
चीन ने इस हस्तांतरण को अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करने और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के क्षेत्र में चीन-ऑस्ट्रेलिया सहयोग का महत्वपूर्ण परिणाम बताया। साथ ही कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क और समझ को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, ऑस्ट्रेलियाई पक्ष ने कहा कि यह वापसी केवल सांस्कृतिक वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान, जिम्मेदारी की भावना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के महत्व को भी दर्शाती है। ऑस्ट्रेलिया ने उम्मीद जताई कि इस पहल से दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में आगे भी सहयोग जारी रहेगा।
चीन के राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत प्रशासन ने 2025 में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय और हेनान प्रांत के सांस्कृतिक विरासत एवं सार्वजनिक सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर इन दोनों कलाकृतियों की वापसी के लिए नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया को एक ज्ञापन और सहायक साक्ष्य सौंपे थे। इसके माध्यम से औपचारिक रूप से कलाकृतियों को चीन लौटाने का अनुरोध किया गया था।
इन धरोहरों की सफल वापसी चीन के राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत प्रशासन और ऑस्ट्रेलिया में चीनी दूतावास के बीच समन्वय से संभव हुई। यह प्रक्रिया सांस्कृतिक संपत्ति के अवैध आयात, निर्यात और स्वामित्व हस्तांतरण को प्रतिबंधित करने तथा रोकने से संबंधित यूनेस्को के 1970 के सम्मेलन के तहत पूरी की गई।
इसके अलावा, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2009 में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन और नेशनल गैलरी ऑफ ऑस्ट्रेलिया की 2021 की उचित जांच एवं कलाकृतियों की उत्पत्ति संबंधी शोध नीति ने भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
--आईएएनएस
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