असम में वोटर लिस्ट से विदेशियों के नाम हटाने के लिए हर 5 साल में एसआईआर की जरूरत: जयंत मल्ला बरुआ
गुवाहाटी, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम सरकार के कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बुधवार को हर पांच साल में वोटर लिस्ट के एसआईआर की मांग की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि राज्य की वोटर लिस्ट में किसी भी विदेशी नागरिक का नाम न रहे।
राज्य में मतदाता सूची सत्यापन, नागरिकता और अवैध अप्रवासन को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच बरुआ ने कहा, "असम में हर कोई एसआईआर चाहता है। असम की मतदाता सूची में एक भी विदेशी का नाम नहीं रहना चाहिए।"
1979 से 1985 के बीच असम में चले छह साल लंबे विदेशी विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के पास मतदाता सूचियों की नियमित रूप से जांच सुनिश्चित करने के विशेष कारण थे।
यह आंदोलन, जिसका समापन 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर के साथ हुआ, अवैध अप्रवासियों की पहचान करने और मतदाता सूचियों में उनके शामिल होने को लेकर चिंताओं को दूर करने की मांगों पर केंद्रित था।
बरुआ की ये टिप्पणियां असम में मतदाता पात्रता और अवैध अप्रवासियों की पहचान को लेकर जारी राजनीतिक मतभेदों की पृष्ठभूमि में आई हैं।
मंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से संबंधित आरोपों और मतपत्र मतदान प्रणाली पर वापस लौटने की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष की आलोचना भी की।
चुनाव हारने के बाद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने का आरोप लगाते हुए बरुआ ने कहा कि पार्टी फैसले को स्वीकार करने के बजाय अक्सर ईवीएम को दोषी ठहराती है या अन्य चिंताएं उठाती है।
उन्होंने कहा, "कांग्रेस कभी जनता के साथ खड़ी नहीं होती, इसीलिए वे लगातार हारते रहते हैं। और हारने के बाद वे ईवीएम को दोष देते हैं, कभी मतपत्रों को, या अन्य बहाने बनाते हैं।"
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता और ईवीएम के कामकाज को लेकर चिंता जताई है, जिससे यह मुद्दा सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच विवाद का विषय बन गया है।
मंगलवार को नलबाड़ी में आयोजित जनजागरण समदल रैली के बारे में बात करते हुए बरुआ ने दावा किया कि केंद्र और असम में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों को महिलाओं और युवाओं का बढ़ता समर्थन मिल रहा है। आयोजकों ने दावा किया कि रैली में 30,000 से अधिक लोग शामिल हुए, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
मंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का विरोध करने वाले समूहों की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनका रुख देश के हितों के विपरीत है।
पांच साल के एसआईआर चक्र की उनकी मांग से असम में नागरिकता, मतदाता पात्रता और अवैध आप्रवासन को लेकर चल रही बहस में एक नया आयाम जुड़ने की उम्मीद है। इस तरह के संशोधनों की आवृत्ति और कार्यान्वयन संबंधी कोई भी निर्णय लागू कानूनी ढांचे के तहत सक्षम चुनावी अधिकारियों के पास होता है।
--आईएएनएस
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