बाढ़ के कारण गांवों का संपर्क टूटा, 80,000 लोगों को अभी तक राहत नहीं: हिमंता बिस्वा सरमा
गुवाहाटी, 24 जुलाई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि ऊपरी असम के सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लगभग 80,000 लोगों को अभी तक राहत नहीं मिली है।
यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य भर में बड़े पैमाने पर बचाव और राहत अभियान जारी होने के बावजूद नाजिरा में लगभग 50,000 और शिवसागर में 30,000 लोग अभी भी पहुंच से बाहर हैं।
सरमा ने कहा कि नाजिरा में लगभग 50,000 और शिवसागर में लगभग 30,000 लोग ऐसे हैं जिन तक सरकार अभी तक राहत नहीं पहुंचा पाई है। बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन ये क्षेत्र अभी भी पहुंच से बाहर हैं।
उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर जलस्तर घटने के संकेत मिले हैं, लेकिन कई दूरदराज के गांवों का संपर्क अभी भी बाधित है, जिससे राहत एजेंसियों के लिए चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), सेना और जिला प्रशासन की टीमें नावों और अन्य उपलब्ध साधनों के माध्यम से अलग-थलग पड़े क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।
सभी प्रभावित निवासियों तक जल्द ही राहत पहुंचने का विश्वास जताते हुए सरमा ने कहा कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और जहां भी आवश्यक हो, अतिरिक्त संसाधन तैनात कर रहा है।
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है, साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि खोज अभियान जारी रहने और कई लोगों के अभी भी लापता होने के कारण यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बाढ़ ने बिजली के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में 60,000 से अधिक घरों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। बहाली का काम जारी है, हालांकि जलमग्न क्षेत्रों में पहुंच की बाधाओं के कारण मरम्मत कार्य में देरी हो रही है।
सरमा ने घोषणा की कि केंद्र सरकार की एक अंतर-मंत्रालयी टीम शनिवार को असम पहुंचेगी, जो बाढ़ से हुए नुकसान का जमीनी आकलन करेगी और वित्तीय सहायता एवं पुनर्वास उपायों की आवश्यकता की समीक्षा करेगी।
ऊपरी असम के जिलों, विशेष रूप से शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में, भारी बारिश और ऊपरी नदियों से आए जल प्रवाह के कारण इस मौसम की सबसे भीषण बाढ़ आई है, जिसके चलते व्यापक बचाव एवं राहत अभियान चलाए जा रहे हैं।
--आईएएनएस
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