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असम और अरुणाचल प्रदेश 33 विवादित गांवों में सीमांकन प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमत हुए

असम और अरुणाचल प्रदेश 33 विवादित गांवों में सीमांकन प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमत हुए
असम और अरुणाचल प्रदेश 33 विवादित गांवों में सीमांकन प्रक्रिया में तेजी लाने पर सहमत हुए

गुवाहाटी, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। पापुम पारे जिले और असम के बिश्वनाथ और लखीमपुर जिलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों से संबंधित क्षेत्रीय समिति की दूसरी बैठक के बाद असम और अरुणाचल प्रदेश ने सीमांकन में तेजी लाने और अंतरराज्यीय सीमा से लगे गांवों में लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान के लिए एक कार्यसूची तैयार करने पर सहमति जताई है।

बैठक में अरुणाचल प्रदेश के शहरी मामलों के मंत्री बालो राजा और असम के राजस्व मंत्री केशव महंत ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया।

बैठक के दौरान, जिला अधिकारियों ने 9 जनवरी, 2023 को हुई पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा की, जिसमें विवादित क्षेत्रों की पहचान करने और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की सुविधा के लिए किए गए संयुक्त क्षेत्र निरीक्षण भी शामिल थे।

अधिकारियों ने बताया कि विवादित गांवों को समाधान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

नौ गांव श्रेणी-प्रधम में आते हैं, जबकि अपेक्षाकृत छोटे स्थानीय विवादों वाले 22 गांव श्रेणी-द्वितीय में और जटिल विवादों वाले दो गांव श्रेणी-तृतीय में आते हैं।

समितियों ने श्रेणी-1 के नौ गांवों में तुरंत सीमांकन स्तंभ लगाने पर सहमति जताई।

श्रेणी-द्वितीय के गांवों से संबंधित विवादों का समाधान संबंधित जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा। दोनों राज्यों ने दो महीने के भीतर औपचारिक सीमांकन शुरू करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण एजेंसी (सर्वेक्षण विभाग) को नियुक्त करने का भी निर्णय लिया।

उन्होंने आपसी सहमति से तय की गई समय सीमा के अनुसार यथास्थिति बनाए रखने, विवादित क्षेत्रों में नए अतिक्रमण और वृक्षारोपण को रोकने और किसी भी राज्य के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (फर्स्ट रिपोर्ट) को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति व्यक्त की।

श्रेणी-तृतीय के दो गांवों के लिए समिति स्थानीय विधायकों, जिला अधिकारियों और निवासियों से परामर्श के बाद एक कार्ययोजना तैयार करेगी।

क्षेत्रीय समिति की अगली बैठक दिसंबर के अंत में निर्धारित है।

असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद 1951 से चला आ रहा है, जब गोपीनाथ बोरदोलोई समिति की सिफारिशों के बाद पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी से 3,600 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र असम को हस्तांतरित कर दिया गया था।

इसके बाद अरुणाचल प्रदेश ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। यह नवीनतम पहल 15 जुलाई, 2022 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित नामसाई घोषणा के बाद आई है।

इस समझौते के तहत विवादित गांवों की संख्या 123 से घटाकर 86 कर दी गई और बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए 12 क्षेत्रीय समितियों का गठन किया गया।

--आईएएनएस

एमएस/

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