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असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थियों के लिए 41.67 करोड़ रुपए की सब्सिडी की मंजूर

असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थियों के लिए 41.67 करोड़ रुपए की सब्सिडी की मंजूर
असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थियों के लिए 41.67 करोड़ रुपए की सब्सिडी की मंजूर

गुवाहाटी, 31 जुलाई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 9,289 लाभार्थियों के लिए 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत बकाया राज्य सब्सिडी के तौर पर 41.67 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने कहा कि इस मदद से बाढ़ से प्रभावित चार जिलों के परिवारों को फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, "असम के चार जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, इसलिए हमारी सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।"

उन्होंने कहा कि पहले से चल रहे राहत और पुनर्वास कार्यों के अलावा, सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले योग्य लाभार्थियों के लिए पीएम सूर्य घर योजना के तहत लंबित राज्य सब्सिडी के तौर पर 41.67 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं।

सरमा ने कहा कि उन्होंने बिजली विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) मंजूर की गई सब्सिडी को मंगलवार तक सभी 9,289 लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर कर दे।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब राज्य बाढ़ की ताजा लहर से प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्वास के प्रयास जारी रखे हुए है। अधिकारी भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रहे हैं और जरूरी सेवाओं को बहाल कर रहे हैं।

एक अन्य पोस्ट में मुख्यमंत्री ने प्रभावित जिलों में बचाव और राहत कार्यों में लगे नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एसडीआरएफ) और दूसरी एजेंसियों के कर्मचारियों की तारीफ की।

सरमा ने कहा, "बाढ़ शुरू होने के बाद से बचाव टीमें बिना थके काम कर रही हैं। वे मुश्किल हालात के बावजूद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने और फंसे लोगों तक जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने का काम कर रही हैं। जब से बाढ़ आई है, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के बहादुर जवान दूसरी एजेंसियों के साथ लगातार जमीन पर डटे हैं, लोगों को बचा रहे हैं और जीवनरक्षक चीजें पहुंचा रहे हैं।"

--आईएएनएस

एबीएम/

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