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राजस्थान: डीएपी की कमी को लेकर अशोक गहलोत ने 'डबल-इंजन सरकार' पर निशाना साधा

राजस्थान: डीएपी की कमी को लेकर अशोक गहलोत ने 'डबल-इंजन सरकार' पर निशाना साधा
राजस्थान: डीएपी की कमी को लेकर अशोक गहलोत ने 'डबल-इंजन सरकार' पर निशाना साधा

जयपुर, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद की कथित कमी को लेकर भाजपा की 'डबल-इंजन सरकार' पर पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित न कर पाने का आरोप लगाया है।

सरसों की बुवाई का समय चल रहा है और खबरें हैं कि किसानों को ब्लैक मार्केट में डीएपी के लिए बहुत ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरसों की बुवाई के अहम मौसम में किसानों को डीएपी पाने में मुश्किल हो रही है।

उनके बयानों में दी गई जानकारी के अनुसार, डीएपी का एक बैग, जिसकी कीमत आम तौर पर 1,350 रुपए होती है, वह ब्लैक मार्केट में 2,100 रुपए से 2,200 रुपए में बेचा जा रहा है। अशोक गहलोत ने यह भी दावा किया कि सहकारी समितियों ने अपनी खाद की जरूरतें बता दी थीं, लेकिन सप्लाई अभी तक नहीं पहुंची है।

खबरों के मुताबिक, खाद की कमी की वजह से सत्ताधारी भाजपा के कैबिनेट मंत्री और विधायक भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से संपर्क कर रहे हैं। हालांकि स्थिति अभी भी वैसी ही बनी हुई है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में गहलोत ने कहा कि सितंबर से ही कई जिलों से खाद की कमी की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किसानों पर सामान्य डीएपी के साथ-साथ नैनो डीएपी जैसे उत्पाद खरीदने का दबाव डाला जा रहा है।

गहलोत ने सवाल किया, "यह कैसा विकास है, जहां अन्नदाता (किसान) को बुआई के लिए ब्लैक मार्केट से खाद खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है?" उन्होंने भाजपा सरकार से तुरंत पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने और ब्लैक मार्केटिंग में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की।

इन आरोपों के बीच राज्य सरकार का कहना है कि रबी 2026–27 सीजन के दौरान किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाद की उपलब्धता पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

कृषि विभाग के अनुसार, राजस्थान में अभी 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 97,000 मीट्रिक टन एनपीके और 2.08 लाख मीट्रिक टन एसएसपी मौजूद है।

विभाग ने कहा कि जिन जिलों और ब्लॉकों में खाद की उपलब्धता कम है और खपत ज्यादा है, उनकी पहचान की जा रही है, ताकि मांग के अनुसार सप्लाई को प्राथमिकता दी जा सके।

हाल ही में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय उर्वरक वितरण नियामक टास्क फोर्स की बैठक हुई। इस बैठक में रबी सीजन के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाली खाद की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने और जमाखोरी व कालाबाजारी को रोकने पर जोर दिया गया।

कृषि और बागवानी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है और उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे अफवाहों और गुमराह करने वाली जानकारी के आधार पर बेवजह खाद न खरीदें या उसका स्टॉक न करें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर यह पक्का कर रही है कि राजस्थान की जरूरतों के हिसाब से सप्लाई होती रहे। कृषि मंत्री ने राज्य की फसल विविधीकरण योजनाओं के बारे में भी बताया, जिनका मकसद अनाज वाली फसलों के लिए तय जमीन में बदलाव करते हुए तिलहन और दलहन की खेती को बढ़ावा देना है।

रबी 2025–26 सीजन के दौरान, तिलहन की खेती 39.82 लाख हेक्टेयर, दलहन की खेती 20.69 लाख हेक्टेयर और अनाज वाली फसलों की खेती 42.77 लाख हेक्टेयर जमीन पर की गई।

रबी 2026–27 सीजन के लिए, तिलहन के लिए 40.06 लाख हेक्टेयर, दलहन के लिए 21.95 लाख हेक्टेयर और अनाज वाली फसलों के लिए 38.50 लाख हेक्टेयर जमीन का प्रस्ताव है।

सरकार ने कहा कि प्रस्तावित फसल क्षेत्रों और उनकी पोषक तत्वों की जरूरतों के आधार पर खाद की सप्लाई और वितरण की योजनाएं तैयार की गई हैं।

जहां गहलोत ने कमी और कालाबाजारी पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है, वहीं राज्य सरकार का कहना है कि खाद का स्टॉक पर्याप्त है और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई पर नजर रखी जा रही है।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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