बंगाल में नीट-यूजी विरोध प्रदर्शन मामले के 16 आरोपियों को अदालत से मिली जमानत
कोलकाता, 28 जुलाई (आईएएनएस)। चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने मंगलवार को कोलकाता में वामपंथी छात्र संगठनों की संयुक्त रैली के दौरान हुई हालिया अशांति के सिलसिले में गिरफ्तार 16 लोगों को 500 रुपए के बॉन्ड पर जमानत दे दी।
आरोपियों के वकीलों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से मना किया गया था। दूसरी ओर, दिल्ली या बिहार जैसे राज्यों से कोई साफ निर्देश न होने के बावजूद सरकारी वकीलों ने जमानत का विरोध नहीं किया और गिरफ्तार किए गए सभी 16 लोगों को जमानत मिल गई।
जब 24 जुलाई की रैली में हुई गड़बड़ी के सिलसिले में मंगलवार को 16 लोगों को कोर्ट में पेश किया गया तो उनके वकीलों ने जमानत की अर्जी दी। शुरू में, सरकारी वकीलों ने अर्जी का विरोध किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने उन्हें 30 जुलाई तक हिरासत में रखने का आदेश दिया।
हालांकि, दोपहर की सुनवाई के दौरान, आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट में केंद्र सरकार के समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली समेत पूरे भारत में नीट आंदोलन से जुड़े केस वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने बिहार और असम का उदाहरण दिया, लेकिन इन राज्यों से कोई साफ गाइडलाइन न होने के कारण, मजिस्ट्रेट ने मामले पर बुधवार को फिर से चर्चा करने की इजाजत दे दी।
बाद में, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलने के बाद वकीलों ने कोर्ट से मंगलवार को ही मामले पर फिर से सुनवाई करने का अनुरोध किया। मजिस्ट्रेट ने अनुरोध मान लिया और सुनवाई फिर से शुरू हुई।
आरोपी यासीन रहमान, राजा सेन और प्रशांत बागची के वकीलों ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलन में गिरफ्तार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से मना किया था।
मजिस्ट्रेट ने पूछा कि कितने आरोपियों का आपराधिक इतिहास है, और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि पुराने अपराधों वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
जांच अधिकारी ने बताया कि 16 में से पांच लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है। बचाव पक्ष के वकीलों ने सवाल किया कि क्या वे पांच लोग अपने पिछले मामलों में दोषी पाए गए थे। कोई साफ जवाब न मिलने पर, मजिस्ट्रेट ने सभी 16 लोगों को जमानत दे दी।
24 जुलाई को, एसएफआई समेत कई वामपंथी छात्र संगठनों ने नीट-यूजी प्रश्न पत्र लीक आंदोलन के समर्थन में सड़कों पर प्रदर्शन किया। सीलदाह से एस्प्लेनेड तक जुलूस और धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
हिंसा के आरोप लगे और कथित तौर पर विवादित पोस्टर, प्लेकार्ड और देश-विरोधी नारे दिखाए गए। रिपोर्टिंग के दौरान कई पत्रकारों पर हमले हुए। गड़बड़ी के सिलसिले में पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया।
--आईएएनएस
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