ड्राइवर की हत्या के मामले में गवाहों को धमकाने के आरोप में आंध्र प्रदेश के एमएलसी गिरफ्तार
अमरावती, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश में एक चर्चित हत्या मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी से जुड़े विधान परिषद सदस्य अनंता बाबू को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। उन पर अपने ड्राइवर और दलित युवक वीधी सुब्रह्मण्यम की हत्या के मामले में गवाहों को धमकाने और प्रभावित करने का आरोप है।
राजमहेंद्रवरम में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब अनंता बाबू अदालत में अपनी जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के बाद बाहर निकले। पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। इस दौरान उनकी पत्नी लक्ष्मी दुर्गा, जो इस मामले में सह-आरोपी हैं, भी उनके साथ मौजूद थीं।
पुलिस अब अनंता बाबू को काकीनाडा ले जाने की तैयारी कर रही है, जहां उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से फरार थे और जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर रहे थे। उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस ने पांच विशेष टीमें बनाई थीं, जिनमें सर्किल इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर शामिल थे।
20 अप्रैल को काकीनाडा के सरपावरम थाने में चार प्रमुख गवाहों की शिकायत पर नया मामला दर्ज किया गया था। गवाहों ने आरोप लगाया कि अनंता बाबू ने उन्हें बयान बदलने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की। जब उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार किया, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
तीन गवाहों ने यह भी दावा किया कि उन्हें एक अपार्टमेंट में जबरन बंधक बनाकर रखा गया और बयान बदलने का दबाव बनाया गया। इन आरोपों के बाद अनंता बाबू पर गवाहों से छेड़छाड़ और आपराधिक धमकी के तहत मामला दर्ज किया गया।
विशेष लोक अभियोजक मुप्पला सुब्बाराव ने भी अदालत में याचिका दायर कर उनकी जमानत रद्द करने की मांग की थी। इसमें कहा गया था कि आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
अनंता बाबू, जिनका असली नाम अनंता उदय भास्कर है, पर अपने ड्राइवर सुब्रह्मण्यम (34) की हत्या का आरोप है। 19 मई 2022 को काकीनाडा में सुब्रह्मण्यम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
आरोप है कि अनंता बाबू खुद शव को रात करीब 2 बजे पीड़ित के घर ले गए और इसे सड़क हादसा बताया। हालांकि परिवार ने इसे मानने से इनकार कर दिया और उन पर हत्या का आरोप लगाया। इसके बाद दलित संगठनों और परिजनों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था।
मामले में गिरफ्तारी के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था, हालांकि 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल न होने के कारण दिसंबर 2022 में उन्हें डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी।
बाद में जून 2024 में सत्ता में आई टीडीपी गठबंधन सरकार ने इस मामले की दोबारा जांच का फैसला लिया। जुलाई 2025 में एससी/एसटी विशेष अदालत ने भी इस मामले की पुनः जांच के आदेश दिए थे।
--आईएएनएस
वीकेयू/वीसी

